सरयू के आयोजन में टूट गई राजनीति, जाति और धर्म की दीवार
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर। राजनीति के अनेक रंग हैं। कुछ स्याह होते हैं, कुछ सुफेद। लेकिन, कुछ रंग ऐसे होते हैं, जिनका दरअसल कोई रंग नहीं होता। ये मूलतः संबंधों पर आधारित होते हैं। रामार्चा पूजा में जमशेदपुर पश्चिमी के विधायक सरयू राय के निवास पर उन्हें बधाई देने वाले
सिर्फ जदयू या भाजपा के लोग ही नहीं थे। उन्हें बधाई देने और प्रसाद ग्रहण करने वालों में झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस और अन्य दलों के लोग भी थे। विधायक मंगल कालिंदी, पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी और रामाश्रय प्रसाद को ही ले लें। विचारधारा के मामले में सरयू राय की विचारधारा कुछ और है, मंगल कालिंदी, कुणाल षाड़ंगी, राजेश्वर पांडे, रघुनाथ पांडेय और रामाश्रय प्रसाद की विचारधारा बिल्कुल ही अलग है। आप इस कड़ी में स्वर्गीय सुधीर महतो के भांजे लाल्टू महतो का भी नाम शामिल कर सकते हैं।

सरयू राय इस मत के राजनेता हैं कि विचारधारा बेशक अलग हो, नीति साफ होनी चाहिए। हर साल आयोजित होने वाले रामार्चा पूजा में यह दिख भी जाता है कि कैसे हर दल के लोग पूजा में बैठते हैं, प्रसाद ग्रहण करते हैं और काफी देर तक आपसी बातचीत में इस तथ्य को भी स्वीकारते हैं कि राजनीतिक विचारधारा कैसी भी हो, आदमी से आदमी का संबंध इंसानियत वाला ही होना चाहिए।

सरयू राय के इस आयोजन में मजहब, जाति की भी दीवारें टूटती हुई दिखीं। लोग महाप्रसाद ग्रहण कर रहे थे। न तो महाप्रसाद देने वाला जाति-धर्म पूछ रहा था, न लेने वाला। यही तो खूबसूरती है। यह एक ऐसा आयोजन था, जिसमें विभिन्न राजनीतिक दलों, जातियों, मजहबों के लोगों ने एक इंसान के तौर पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। यही इस आयोजन को सफल बनाने वाला सबसे शानदार पहलू है।

