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    Home » कड़वा सच:- चुनावी मौसम में याद आए दिनकर, पर उनके आदर्शों से दूर राजनीति ब्रह्मर्षि समाज की चुप्पी भी विचारणीय
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    कड़वा सच:- चुनावी मौसम में याद आए दिनकर, पर उनके आदर्शों से दूर राजनीति ब्रह्मर्षि समाज की चुप्पी भी विचारणीय

    News DeskBy News DeskNovember 2, 2025No Comments1 Min Read
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    कड़वा सच:-

    चुनावी मौसम में याद आए दिनकर, पर उनके आदर्शों से दूर राजनीति ब्रह्मर्षि समाज की चुप्पी भी विचारणीय

    देवानंद सिंह

    “अच्छे होने का, अपने होने का दिखावा करते है ,
    राजनीति में तो हम सब यही छलावा करते है। “

    हर चुनावी मौसम में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की याद तो दिलाई जाती है, लेकिन उनके विचारों और आदर्शों को अपनाने की नीयत कहीं नहीं दिखती। बड़े-बड़े नेता उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर फोटो खिंचवाते हैं, पर उनकी जयंती पर एक ट्वीट करना भी जरूरी नहीं समझते। विडंबना यह है कि बिहार ही नहीं, झारखंड में भी दिनकर की अनदेखी लगातार होती जा रही है

     

    और सबसे चिंताजनक बात यह है कि ब्रह्मर्षि भूमिहार समाज, जो दिनकर की गौरवशाली विरासत का उत्तराधिकारी माना जाता है, इस उपेक्षा पर कोई आवाज नहीं उठाता। आज फिर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर रोड शो की शुरुआत हुई, लेकिन दिनकर के वीरत्व, स्वाभिमान और राष्ट्रवाद के संदेश को कोई आगे नहीं बढ़ा रहा। चुनावी मंचों पर दिनकर के नाम का उपयोग तो होता है, मगर उनके आदर्शों का नहीं यही आज की राजनीति की सबसे बड़ी विडंबना है।

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