टंडवा की सड़कों पर मौत का तांडव: दो युवकों की कुचलकर मौत, आक्रोश में उबल उठा जनसैलाब ।
राष्ट्र संवाद संवाददाता
। हर सुबह यहां सूरज उम्मीद नहीं, किसी अनहोनी का डर लेकर उगता है। इस सड़क पर चलते कदमों को नहीं पता वो घर लौटेंगे या किसी माँ की गोद हमेशा के लिए सूनी कर जाएंगे। हर हादसे के साथ सिर्फ जिंदगियां नहीं जातीं, पूरे परिवार की दुनिया उजड़ जाती है लेकिन अफसोस, ये चीखें अब भी किसी को सुनाई नहीं दे रहीं। यह अब सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि हर दिन टूटते घरों की दर्दनाक कहानी बन चुकी है। टंडवा की सड़कों पर शाम से सुबह तक मौत जैसे खुलेआम दौड़ रही है। बुधवार, 6 मई की सुबह करीब 5:30 बजे ब्लॉक मोड़ से आगे मजराही में एक तेज रफ्तार कोयला लदा हाइवा दो युवकों को कुचलते हुए निकल गया। टक्कर इतनी भयानक थी कि दोनों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
यह कोई पहली घटना नहीं है और यही सबसे बड़ा डर है। यहां हर दिन कोई न कोई माँ अपनी गोद खो रही है, किसी बच्चे के सिर से माता-पिता का साया उठ रहा है, तो कहीं किसी सुहागन की मांग उजड़ रही है। लेकिन न सरकार जाग रही है, न प्रशासन मानो सब कुछ देखकर भी अनदेखा किया जा रहा हो।स्थानीय लोगों का कहना है कि यह हादसा नहीं, सीधी-सीधी लापरवाही से हुई हत्या है। कोयला ढोने वाले हाइवा बेकाबू रफ्तार में गांवों और बाजारों से गुजरते हैं। न कोई तय रूट, न समय की पाबंदी, न ही सुरक्षा का ध्यान। आम सड़कें अब कोल ट्रांसपोर्ट का रास्ता बन चुकी हैं, जहां आम आदमी की जिंदगी की कोई कीमत नहीं बची।
घटना के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने सड़क जाम कर दिया। लोगों की मांग है कि मृतकों के परिवार को मुआवजा और नौकरी दी जाए, साथ ही इस मौत के खेल पर तुरंत रोक लगे। स्थानीय मुखिया महेश मुण्डा ने साफ कहा “अब बहुत हो चुका, कोल हाइवा वाहनों का तांडव बंद होना ही चाहिए। ग्रामीणों ने कोयला परिवहन में लगी कंपनियों पर मनमानी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कंपनियां मुनाफे के लिए नियमों को कुचल रही हैं। घनी आबादी वाले इलाकों से भी भारी वाहन तेज रफ्तार में दौड़ाए जा रहे हैं। न स्पीड कंट्रोल, न मॉनिटरिंग सब कुछ भगवान
सबसे बड़ा सवाल यही है , कब तक सड़कों पर लाशें गिरती रहेंगी? कब तक हर हादसे के बाद सिर्फ जाम, मुआवजा और फिर वही खामोशी दोहराई जाएगी? अगर अब भी आवाज नहीं उठी, तो यह “खूनी सड़क” और कितनी जिंदगियां निगलेगी, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं। यह वक्त है खामोशी तोड़ने का। यह वक्त है,जवाब मांगने का। क्योंकि अगला नंबर… किसी का भी हो सकता है।

