यूसील कॉलोनी में गिरा क्वार्टर का छज्जा, बाल-बाल बचे कर्मी,जर्जर क्वार्टरों से दहशत में कर्मचारी, संपदा विभाग पर लापरवाही का आरोप
डीजीएम पर्सनल राकेश कुमार पर दिलीप कुमार मंडल को बचाने का लग रहा आरोप
राष्ट्र संवाद मुख्य संवाददाता
जादूगोड़ा:यूसील कॉलोनी की जर्जर हो चुकी आवासीय व्यवस्था अब कर्मियों के लिए जानलेवा साबित होने लगी है। सोमवार संध्या आई तेज आंधी के दौरान कॉलोनी स्थित सी-30 क्वार्टर का छज्जा अचानक भरभराकर गिर गया। संयोगवश घटना के कुछ क्षण पहले ही नीचे कार्यरत विद्युत कर्मी वहां से हटे थे, नहीं तो बड़ा हादसा हो सकता था। घटना के बाद कॉलोनीवासियों में दहशत का माहौल है तथा संपदा विभाग के खिलाफ भारी नाराजगी देखी जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कॉलोनी के अधिकांश क्वार्टर पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। कई बार शिकायत के बावजूद मरम्मत कार्य नहीं कराया जा रहा है। घटना के बाद संपदा विभाग के सिविल अधिकारी दिलीप कुमार मंडल को हटाने की मांग तेज हो गई है। वहीं डीजीएम पर्सनल राकेश कुमार पर उन्हें संरक्षण देने का आरोप भी लगाया जा रहा है।
यूरेनियम मजदूर संघ के नेता उमेश प्रसाद, जो उसी क्वार्टर में रहते हैं, ने बताया कि क्वार्टर की जर्जर स्थिति को लेकर कई बार संपदा विभाग से शिकायत की गई, लेकिन कोई ठोस पहल नहीं हुई। उन्होंने कहा कि छज्जा पूरी तरह कमजोर हो चुका था और कभी भी बड़ा हादसा हो सकता था। इस ब्लॉक में करीब 16 परिवार निवास करते हैं जो हमेशा भय के साये में रहने को मजबूर हैं।
यूसील कॉलोनी में लगभग 2200 क्वार्टर हैं, जिनमें अधिकारी और कर्मचारी दोनों रहते हैं। ई एवं डी टाइप क्वार्टर अधिकारियों के लिए जबकि सी, बी, ए एवं टाइप-वन क्वार्टर कर्मचारियों के लिए बनाए गए हैं। कर्मियों का कहना है कि 50 वर्ष से अधिक पुराने हो चुके इन क्वार्टरों की हालत दिन-प्रतिदिन बदतर होती जा रही है।

कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि क्वार्टर मरम्मत के नाम पर टेंडर तो निकाले जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्य नहीं दिखता। कॉलोनी की सड़कें भी बदहाल हो चुकी हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। कर्मचारियों का कहना है कि कॉलोनी की खराब स्थिति के कारण अब रिश्तेदार भी यहां आने से कतराने लगे हैं तथा बच्चों के विवाह में भी दिक्कतें आने लगी हैं।
20 वर्षों से एक ही पद पर जमे अधिकारी पर उठे सवाल
कर्मचारियों और यूनियन नेताओं ने संपदा विभाग के सिविल अधिकारी दिलीप कुमार मंडल की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आरोप है कि वह लगभग 20 वर्षों से उसी पद पर कार्यरत हैं और कई बार हटाने की मांग के बावजूद प्रबंधन उन्हें नहीं हटाता।
यूनियन नेताओं का आरोप है कि उनके कार्यकाल में बने करीब दो करोड़ रुपये की लागत वाले चारदीवारी निर्माण कार्य में भी भारी अनियमितता हुई, जो अब जर्जर हो चुका है। वहीं बी-टाइप क्वार्टरों में कराया गया रंग-रोगन भी कुछ ही समय में उखड़ने लगा है।
नेताओं का कहना है कि डीजीएम पर्सनल राकेश कुमार के संरक्षण के कारण उन पर कार्रवाई नहीं होती। हाल के दिनों में संपदा विभाग के कई अधिकारियों का तबादला किया गया, लेकिन दिलीप कुमार मंडल को नहीं हटाया गया, जिससे कर्मचारियों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
“डर के साये में जी रहे हैं मजदूर”
कॉलोनी के कई क्वार्टरों के छज्जे जर्जर
पहले भी गिर चुके हैं प्लास्टर व छज्जे
16 परिवारों पर मंडरा रहा खतरा
शिकायत के बावजूद नहीं हुई मरम्मत
कर्मचारियों ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग
कॉलोनी की सड़कें भी बनी दुर्घटना का कारण
प्रमुख मांगें
जर्जर क्वार्टरों की तत्काल मरम्मत
संपदा विभाग की कार्यशैली की जांच
जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई
कॉलोनी की सड़कों का पुनर्निर्माण
पुराने क्वार्टरों का पुनर्विकास योजना लागू करने की मांग

