दुमका की राजनीति से भी गहरा रहा रूपी सोरेन का रिश्ता
*1999 में शिबू सोरेन की राजनीतिक विरासत संभाल मैदान में उतरी थीं रूपी, बाबूलाल मरांडी से महज 4,648 वोट से मिली थी हार*
राष्ट्र संवाद संवाददाता, दुमका
रूपी सोरेन के निधन की खबर से सोरेन परिवार और झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ताओं-समर्थकों में शोक की लहर है। दुमका से भी उनका पुराना और भावनात्मक रिश्ता रहा। यही वह राजनीतिक धरती है, जहां शिबू सोरेन ने अपने लंबे राजनीतिक जीवन की मजबूत पहचान बनाई और जहां से सोरेन परिवार की कई पीढ़ियों का राजनीतिक जुड़ाव रहा है।
1999 के लोकसभा चुनाव में झामुमो ने रूपी सोरेन को दुमका लोकसभा सीट से मैदान में उतारा था। उस चुनाव में भाजपा के बाबूलाल मरांडी ने 2,01,141 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी, जबकि झामुमो प्रत्याशी रूपी सोरेन किस्कू को 1,96,493 वोट मिले थे। उन्हें महज 4,648 वोटों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा था। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों में यह मुकाबला बेहद करीबी दर्ज है।
शिबू सोरेन के लंबे राजनीतिक सफर के दौरान रूपी सोरेन ने परिवार की जिम्मेदारियों को संभाला। परिवार और बच्चों की देखभाल के साथ उन्होंने सोरेन परिवार के राजनीतिक जीवन के शुरुआती दौर को भी करीब से देखा।
हेमंत सोरेन भी दुमका विधानसभा से 2009 में विधायक चुने गए थे। बाद में 2014 में उन्होंने बरहेट से विधानसभा चुनाव जीता और दुमका सीट पर भाजपा की लुईस मरांडी से हार गए। वर्तमान में दुमका विधानसभा का प्रतिनिधित्व उनके छोटे भाई बसंत सोरेन कर रहे हैं।
रूपी सोरेन का दुमका आना-जाना लंबे समय तक बना रहा और इस क्षेत्र से उनका पारिवारिक व राजनीतिक संबंध भी कायम रहा।

