टाटा स्टील का 119वां स्थापना दिवस : राष्ट्र निर्माण, नवाचार और सतत विकास की मिसाल
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर : 26 अगस्त 1907 को साकची की धरती पर शुरू हुई टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी (टिस्को) ने आज 119 वर्ष पूरे कर लिए। महान उद्योगपति जमशेदजी नसरवानजी टाटा के दूरदर्शी सपने से जन्मी यह कंपनी सिर्फ एक इस्पात उद्योग नहीं, बल्कि भारत के औद्योगिक और सामाजिक विकास की मजबूत आधारशिला है।

टाटा स्टील ने शुरुआत से ही सफलता को केवल उत्पादन या लाभ तक सीमित न रखकर समाजसेवा को अपना उद्देश्य बनाया। कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) की अवधारणा लोकप्रिय होने से बहुत पहले से ही कंपनी ने समुदाय कल्याण को अपनी प्राथमिकता बनाया। वित्तीय वर्ष 2024-25 में इसकी सीएसआर पहलों से 57.7 लाख से अधिक लोगों को लाभ पहुंचा।

कंपनी ने विश्व युद्धों, आर्थिक संकटों और तकनीकी बदलावों जैसी चुनौतियों का सामना करते हुए भारत का पहला एकीकृत इस्पात संयंत्र बनने से लेकर वैश्विक इस्पात उत्पादक बनने तक की लंबी यात्रा तय की है। कलिंगानगर में भारत का सबसे बड़ा ब्लास्ट फर्नेस शुरू करना और लुधियाना व पोर्ट टैलबॉट में इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस स्थापित करना इसी प्रगतिशील सोच का हिस्सा है।

टाटा स्टील ने 2045 तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन का लक्ष्य तय किया है और डीकार्बोनाइजेशन, नवीकरणीय ऊर्जा तथा सर्कुलर इकॉनमी पर लगातार निवेश कर रही है।

119 साल की इस यात्रा में टाटा स्टील ने यह सिद्ध किया है कि उद्योग का असली उद्देश्य केवल उत्पादन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण, जनकल्याण और पर्यावरण संरक्षण भी है।

