लोकगीतों और लोकसंस्कृति की गूंज से सजा “स्वर लोकमंथन के” कार्यक्रम
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर। अखिल भारतीय साहित्य परिषद, न्यास एवं तुलसी भवन के संयुक्त तत्वावधान में लोकगीतों एवं लोकसंस्कृति पर आधारित भव्य सांस्कृतिक आयोजन “स्वर लोकमंथन के” का आयोजन गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में भारतीय लोकभाषाओं, लोकपरंपराओं और लोकगीतों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर सार्थक विमर्श के साथ विविध भाषाओं में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता तुलसी भवन के मानद महासचिव डॉ. परसेनजीत तिवारी ने की, जबकि मंच संचालन संगठन महामंत्री सूरज सिंह राजपूत ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में रीवा, मध्य प्रदेश से आए डॉ. देवदास साकेत ने लोकसाहित्य और लोकगीतों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि लोकसंस्कृति भारतीय सभ्यता की आत्मा है। अतिथि वक्ता के रूप में वाल्मीकि कुमार प्रखर उपस्थित रहे। वहीं डॉ. रागिनी भूषण, विजया लक्ष्मी वेदुला एवं संदीप मुरारका सम्मानित अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
कार्यक्रम संयोजिका एवं अखिल भारतीय साहित्य परिषद की केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. मीनाक्षी मीनल ने विषय-प्रवेश कराया, जबकि स्वागत भाषण महानगर अध्यक्ष शैलेंद्र पांडे ‘शैल’ ने दिया। अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. परसेनजीत तिवारी ने कहा कि लोकगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की संवेदनाओं और सांस्कृतिक मूल्यों के जीवंत दस्तावेज हैं।
कार्यक्रम में संथाली, बंगाली, भोजपुरी, पंजाबी, बज्जिका, संस्कृत, राजस्थानी और मैथिली समेत विभिन्न लोकभाषाओं में आकर्षक प्रस्तुतियां दी गईं। जोबा मुर्मू, राजेंद्र राज शाह, सुदीप्ता जेठी राउत, ब्रजेंद्रनाथ मिश्र, बलविंदर सिंह, उपासना सिन्हा, डॉ. रागिनी भूषण, वसंत जमशेदपुरी, नीलम पेडीवाल, ममता करण और नीलांबर चौधरी की प्रस्तुतियों को श्रोताओं ने खूब सराहा।
इसके अलावा वीणा पांडे भारती, आरती श्रीवास्तव, सविता सिंह, मीरा बेन, अनीता निधि, पूनम सिंह, संगीता मिश्रा, सुष्मिता मिश्रा, आलोक मंजरी और प्रियंका प्रियदर्शनी सहित कई कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को यादगार बना दिया। अंत में मुकेश रंजन ने धन्यवाद ज्ञापन किया तथा राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

