समाज की सुरक्षा के लिए 24 घंटे ड्यूटी करने वाले पुलिसकर्मियों के संघर्ष और ‘खाकी वर्दी’ के पीछे छिपी पीड़ा पर अमन शांडिल्य का विशेष आलेख पढ़ें।
अमन शांडिल्य
अक्सर समाज में पुलिसकर्मियों की कार्यशैली को लेकर सवाल उठाए जाते हैं, लेकिन खाकी वर्दी पहनकर दिन-रात जनता की सुरक्षा में लगे पुलिस पदाधिकारी और जवानों की वास्तविक पीड़ा और संघर्ष को समझना भी उतना ही जरूरी है। सड़क पर खड़े होकर यातायात नियंत्रित करने से लेकर कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक, पुलिसकर्मी 24 घंटे अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं।
कई बार मौसम की परवाह किए बिना, धूप-बारिश और कड़ाके की ठंड में भी पुलिसकर्मी सड़कों पर डटे रहते हैं। त्योहारों, विशेष आयोजनों और आपात स्थितियों में उनकी ड्यूटी और भी बढ़ जाती है। ऐसे में पुलिस पदाधिकारी और जवानों का कहना है कि किसी भी प्रकार का प्रश्न उठाने से पहले लोगों को उनकी परिस्थितियों और जिम्मेदारियों को समझने की आवश्यकता है।
हालांकि यह भी सच है कि कुछ अपवाद पुलिसकर्मी ऐसे भी होते हैं जो अपने व्यवहार से पूरे विभाग को बदनाम करने से नहीं चूकते, लेकिन इसके बावजूद अधिकांश पुलिसकर्मी और पदाधिकारी पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करते हैं और जनता की सुरक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं।
पुलिसकर्मियों का कहना है कि खाकी वर्दी केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि समाज और देश की सुरक्षा के प्रति एक समर्पण है। कई बार उन्हें अपने परिवार से दूर रहकर भी लगातार ड्यूटी करनी पड़ती है, ताकि आम जनता सुरक्षित रह सके।
समाज के विभिन्न वर्गों ने भी माना कि पुलिसकर्मियों के त्याग और समर्पण को समझना और उनका सम्मान करना हम सभी की जिम्मेदारी है। जनता और पुलिस के बीच आपसी विश्वास और सहयोग से ही कानून-व्यवस्था मजबूत रह सकती है।

