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    Home » जन्मदिन पर विशेष
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    जन्मदिन पर विशेष

    Devanand SinghBy Devanand SinghMarch 5, 2024No Comments3 Mins Read
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    “कुछ पाकर खोना है। कुछ खोकर पाना है। जीवन का मतलब तो आना और जाना है। दो पल के जीवन से एक उम्र चुरानी है। ज़िंदगी और कुछ भी नहीं। तेरी मेरी कहानी है।” साल 1972 में आई शोर फिल्म का ये गीत आपने सुना होगा, गुनगुनाया होगा, जिया होगा और महसूस भी किया होगा। ये गीत संतोष आनंद जी ने लिखा था। आज महान गीतकार संतोष आनंद जी का जन्मदिन है। 05 मार्च 1929 को बुलंदशहर के पास स्थित सिकंदराबाद में जन्मे संतोष आनंद जी कभी दिल्ली में लाइब्रेरियन की हैसियत से काम किया करते थे। कविताई के शौकीन थे तो कवि सम्मेलनों में जाते रहते थे। पहले सिर्फ दूसरे कवियों को सुनने। बाद में अपनी रचनाएं सुनाने।

     

     

     

    इनकी रचनाओं ने लोगों पर इतना गहरा असल किया कि देखते ही देखते ये उस ज़माने में दिल्ली में होने वाले कवि सम्मेलनों का आकर्षण बन गए। फिर तो क्या दिल्ली क्या मुंबई, क्या सूरत तो क्या लखनऊ, देश के अलग-अलग शहरों में संतोष आनंद जी को कविता पाठ करने के लिए बुलाया जाने लगा। एक दफा मुंबई में हुए एक कवि सम्मेलन में इनकी मुलाकात ताराचंद बड़जात्या जी से हुई। ताराचंद बड़जात्या जी इनके बड़े प्रभावित हुए थे। वो चाहते थे कि ये मुंबई में ही रुक जाएं और गीतकारी करें। लेकिन तब ये मुंबई में नहीं रहना चाहते थे, सो इन्कार करके वापस दिल्ली लौट आए। मगर किस्मत में जो लिखा होता है वो तो होना ही होता है। और उसके लिए बहाने खुद ब खुद किस्मत बनाती चली जाती है।

     

     

     

    दिल्ली में मेरा नाम जोकर फिल्म की शूटिंग चल रही थी। मनोज कुमार जी भी शूटिंग करने आए थे। एक दिन इनका एक दोस्त इनके पास आया और बोला,”चलो मेरे साथ। तुम्हें मनोज कुमार बुला रह हैं।” इनका वो दोस्त अलीगढ़ यूनिवर्सिटी में इनके साथ पढ़ चुका था। उनका नाम था हरी भारद्वाज। जिस वक्त हरी भारद्वाज मनोज कुमार का बुलावा देने इनके पास आए थे उस वक्त रात के 12 बजे का वक्त हो रहा था। संतोष आनंद मनोज कुमार से मिलने पहुंचे भी। मनोज कुमार खूब गर्मजोशी से इनसे मिले। फिर अगले दिन एक कविता सम्मेलन हुआ। संतोष आनंद जी ने जब अपनी कविताएं पढ़नी शुरू की तो लोग वाह-वाह कर उठे। मनोज कुमार भी दर्शक दीर्घा में बैठे थे।

     

     

     

    उस दिन मनोज कुमार भी इनकी कविताओं से बड़े प्रभावित हुए। वो कवि सम्मेलन देर रात खत्म हुआ। और मनोज कुमार भी देर रात तक ही बैठे रहे। मनोज कुमार ने इनसे वादा लिया कि ये उनकी फिल्म पूरब और पश्चिम के लिए कोई गीत लिखेंगे। मुंबई वापस लौटने के कुछ ही दिन बाद मनोज कुमार जी ने संतोष आनंद जी को फ्लाइट की टिकट भेज दी। और इस तरह दिल्ली का एक मशहूर कवि और लाइब्रेरियन मुंबई में एक गीतकार बन गया। इनका पहला गीत था पुर्वा सुहानी आई रे। हम सभी ने सुना है। किस्सा टीवी संतोष आनंद की की अच्छी सेहत के लिए ईश्वर से प्रार्थना करता है। जय हिंद। #SantoshAnand

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