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    सरायकेला: ‘जीएसटी सुधार 2.0’ से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आया उछाल; इंस्टिट्यूट फॉर एजुकेशन में दो दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का आगाज

    dhiraj KumarBy dhiraj KumarApril 17, 2026No Comments3 Mins Read
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    सरायकेला: ‘जीएसटी सुधार 2.0’ से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आया उछाल; इंस्टिट्यूट फॉर एजुकेशन में दो दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का आगाज

    राष्ट्र संवाद संवाददाता

    सरायकेला। सरायकेला स्थित ‘इंस्टिट्यूट फॉर एजुकेशन’ में शुक्रवार को दो दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का भव्य शुभारंभ हुआ। इंडियन काउन्सिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च (ICSSR), नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन का मुख्य विषय ‘जीएसटी सुधारों एवं ग्रामीण व शहरी आजीविका और रोजगार पर प्रभाव’ रखा गया है।

    कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि जमशेदपुर के सेन्ट्रल जीएसटी कमिश्नर बीके गुप्ता, विशिष्ट अतिथि सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष मानव केडिया, सरायकेला नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज चौधरी और मुख्य वक्ता सेंट्रल यूनिवर्सिटी झारखंड के प्रोफेसर डॉ. केबी सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर अतिथियों ने सम्मेलन की स्मारिका (Souvenir) का विमोचन भी किया।

    जीएसटी 2.0: आम आदमी की बढ़ी क्रय शक्ति और कृषि में रोजगार

    मुख्य अतिथि बीके गुप्ता ने पावरप्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से बताया कि 1 जुलाई 2017 को देश में जीएसटी लागू होने के बाद जटिल वैट प्रणाली से मुक्ति मिली है। उन्होंने ‘जीएसटी सुधार 2.0’ के सकारात्मक आंकड़े पेश करते हुए कहा:

    “दवा और पाठ्य सामग्री जैसी अनिवार्य वस्तुओं को कर मुक्त किया गया है। ट्रैक्टर पर जीएसटी को घटाकर 5% करने से गांवों में मशीनीकरण बढ़ा है, जिससे कृषि क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। कर की दरों को 40% की अधिकतम सीमा से घटाकर 28% पर लाना और दैनिक उपभोग की वस्तुओं पर छूट देना, आम जनता की क्रय शक्ति बढ़ाने में सहायक सिद्ध हुआ है।”

    पारदर्शिता और लॉजिस्टिक लागत में आई कमी

    मुख्य वक्ता डॉ. केबी सिंह ने अपने बीज वक्तव्य में कहा कि जीएसटी ने देश के विकास को ‘डबल डोज’ दी है। इससे न केवल लॉजिस्टिक लागत में स्थिरता आई है, बल्कि उद्योगों को अलग-अलग राज्यों के वैट झंझटों से भी छुटकारा मिला है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में ग्रामीण क्षेत्रों में वस्तुओं की मांग शहरों के बराबर होगी।

    विशिष्ट अतिथि मानव केडिया ने छात्र-छात्राओं से अपील की कि वे क्षेत्र के विकास में सहभागी बनें। उन्होंने कहा कि जीएसटी रिफॉर्म 2.0 में ग्रामीण उपयोग की वस्तुओं को रियायत देने से जीवन स्तर में सुधार हुआ है। वहीं, मनोज चौधरी ने पंचायत स्तर पर जीएसटी फाइलिंग की जानकारी देने के लिए कार्यशाला आयोजित करने का सुझाव दिया।

    शोध और अर्थव्यवस्था के लिए मील का पत्थर

    इससे पूर्व, कॉलेज के डायरेक्टर आरएन महांती ने अतिथियों का स्वागत किया। सम्मेलन की कन्वेनर और विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति प्रो. (डॉ.) शुक्ला महांती ने विषयवस्तु पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह आयोजन शोध, अर्थव्यवस्था और शैक्षणिक जगत के लिए मील का पत्थर साबित होगा। उद्घाटन सत्र का समापन प्रिंसिपल डॉ. स्वीटी सिन्हा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

    तकनीकी सत्रों में शोध पत्रों का वाचन

    सम्मेलन के प्रथम दिन तीन महत्वपूर्ण तकनीकी सत्र आयोजित किए गए:

    प्रथम सत्र (जीएसटी और ग्रामीण आर्थिक परिवर्तन): इसकी अध्यक्षता प्रो. जेबी कोमरै ने की। इसमें बिहार और झारखंड सहित देश भर के 13 प्रतिभागियों ने शोध पत्र पढ़े। डॉ. अजेय वर्मा रिसोर्स पर्सन और अमन कुमार तिवारी रिपोर्टिंयर रहे।

    द्वितीय सत्र (जीएसटी और शहरी रोजगार गतिशीलता): एक्सएलआरआई के डॉ. देबाशीष प्रधान की अध्यक्षता में आयोजित इस सत्र में 5 प्रतिभागियों ने पेपर प्रस्तुत किए। रिसोर्स पर्सन के रूप में डॉ. चंद्रशेखर जोशी (जोधपुर) और डॉ. तुलिका महांती (निफ्ट, नई दिल्ली) शामिल हुईं।

    तृतीय सत्र (डिजिटल बुनियादी ढांचा और क्षमता निर्माण): इसकी अध्यक्षता डॉ. शुक्ला महांती ने की। इसमें 8 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। डॉ. देबाशीष प्रधान, डॉ. रेणु वर्मा और डॉ. दीपा शरण रिसोर्स पर्सन के तौर पर उपस्थित रहे।

    सरायकेला: 'जीएसटी सुधार 2.0' से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आया उछाल; इंस्टिट्यूट फॉर एजुकेशन में दो दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का आगाज
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