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    Home » राज्यपाल को ज्ञापन भेजकर टाटा कंपनी का लीज रिन्यूअल नहीं करने की मांग
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    राज्यपाल को ज्ञापन भेजकर टाटा कंपनी का लीज रिन्यूअल नहीं करने की मांग

    Devanand SinghBy Devanand SinghDecember 12, 2024No Comments4 Mins Read
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    राज्यपाल को ज्ञापन भेजकर टाटा कंपनी का लीज रिन्यूअल नहीं करने की मांग
    राष्ट्र संवाद संवाददाता
    घाटशिला
    भारत आदिवासी पार्टी पूर्वी सिंहभूम, जिला कमेटी की ओर से आगामी 31 दिसंबर 2024 को टाटा कंपनी जमशेदपुर का लीज समाप्त होने पर पुनः लीज नवीनीकरण पर विस्तारीकरण की रोक लगाने के संबंध में एक ज्ञापन झारखंड के राज्यपाल को उपायुक्त, पूर्वी सिंहभूम के माध्यम से सौंपा गया। यह ज्ञापन भारत आदिवासी पार्टी के जिला अध्यक्ष मदन मोहन सोरेन के नेतृत्व में सौंपा गया।इस मौके पर मदन मोहन ने कहा कि टाटा कंपनी 115 साल गुजरने के बाद भी पूर्वी सिंहभूम के आदिवासियों, मूलवासियों को आर्थिक, शैक्षणिक एवं समाजिक रूप से सशक्त बनाने में असफल रहा है। कंपनी में आदिवासियों को कभी हिस्सेदार बनाने का प्रयास नहीं किया गया बल्कि नौकरी से भी आदिवासियों को जबरन साजिश के तहत Early Separation Scheme (ESS) देकर कम्पनी से निकल दिया गया। आदिवासियों को साजिश के तहत पलायन होने के लिए मजबूर कर उनकी जनसंख्या को प्रभावित कर जमशेदपुर में अल्पसंख्यक बना दिया गया। टाटा कंपनी ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 (5),19(6) का उल्लंघन कर सिंहभूम जिला की डेमोग्राफी को बदलने का काम किया है। टाटा लीज कर 32 मौजा के आदिवासियों को विस्थापित किया गया और उन्हें पुनर्वास एवं पुनर्व्यास्थापन करने के लिए कभी भी टाटा प्रबंधन के द्वारा गंभीर प्रयास नहीं किया गया।

     

    उन्होंने कहा कि कि टाटा स्टील कंपनी जमशेदपुर का लीज करारनामा 31 दिसंबर 2024 को समाप्त होने के बाद उसे पुनः लीज नवीनीकरण में विस्तारीकरण ना दिया जाए। ताकि सर्वोच्च न्यायालय के समता जजमेंट 1997 और पांचवी अनुसूची के प्रावधानों व सी एन टी एक्ट का मूल भावनाओं का पूर्ण रूप से लागू किया जा सके एवं पैदा हो रहे संवैधानिक संकट को टाला जा सके।
    भारत आदिवासी पार्टी के झारखंड प्रदेश महासचिव कृष्णा हांसदा ने कहा कि पूर्वी सिंहभूम जिला पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र के अंतर्गत आता है। फिर भी पांचवी अनुसूची के प्रावधानों का उल्लंघन कर 2007 में टाटा स्टील को 30 बर्षों के लिए जनवरी 2006 से 31 दिसंबर 2024 तक अवैध और असंवैधानिक तरीकों से टाटा लीज नवीनीकरण किया गया। टाटा स्टील ने टाटा लीज करारनामा का भी उल्लंघन करते रहें हैं। टाटा लीज क्षेत्र के अंतर्गत सभी दुकान, माॅल, होटल रेस्टोरेंट, शिक्षा संस्थान, हास्पिटल, स्वस्थ केंद्र, पेट्रोल पंप, व्यावसायिक शाॅ रुम, बाजार का स्वयं संचालित व नियंत्रण करने के बजाए गैर आदिवासी एवं गैर स्थानीय लोंगों को अवैध और असंवैधानिक तरीकों से लाइसेन्स देकर अवैध जनसंख्या को अनुसूचित क्षेत्र में बसाने और रोजगार देने का काम करते रहे हैं। सेवानिवृत्त टाटा कर्मचारियों एवं अधिकारियों को लीज भूमि को असंवैधानिक आवंटित कर उन्हें अवैध रूप से लीज भूमि में बसाने और उन्हें प्लैट बनाकर अन्य लोगों को भी अनुसूचित क्षेत्र में बसाने का अनुमति देना पांचवीं अनुसुची के मूल प्रावधानों के खिलाफ है।

     

     

    टाटा स्टील ने पिछ्ले 115 बर्षों में लीज क्षेत्र के कम्पनी के आवासीय मकानों को तोड़कर वहां अवैध रूप से व्यावसायिक दुकान, होटल, शॉपिंग कॉम्पलेक्स या संस्थानों को निर्माण कर गैर आदिवासियों और गैर स्थानीयों को अवैध और असंवैधानिक रुप से आवंटित किया है जो लीज करारनामा का उल्लंघन है।

     

    उन्होंने कहा कि टाटा कंपनी पिछले 115 सालों यहां के स्थानीय आदिवासियों एवं मूलवासियों को न रोजगार, व्यावसाय, ठेका, टेंडर में उचित हिस्सा दिया और न ही नौकरियां दी है। आज भी टाटा स्टील में कार्यरत आदिवासी मूलनिवासियों और व्यावासयिओं को उंगलियों में गिना जा सकता है । जिससे यह प्रतीत होता है कि टाटा स्टील लीज नवीनीकरण या विस्तारीकरण पाने का सभी पात्रता खो चुकी है।
    इस अवसर पर कृष्णा हांसदा, मदन मोहन सोरेन, सुनील बनसिंह, दामू प्रमाणिक, पप्पू सोरेन,दीपक लकड़ा, दिलीप हेम्ब्रम आदि उपस्थित थे।

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