ऑनलाइन सट्टेबाजी और ड्रग्स पर बोले सरयू राय, युवाओं को बचाना जरूरी
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर शुक्रवार को जमशेदपुर में सट्टेबाजी और ड्रग्स के दुष्प्रभाव को लेकर ‘विचार क्रांति सम्मेलन’ का आयोजन किया गया. सम्मेलन का उद्देश्य नशे और सट्टेबाजी से समाज एवं युवा पीढ़ी पर पड़ रहे प्रभाव और इससे निपटने के उपायों पर चर्चा करना था. सम्मेलन की तैयारियों के दौरान भी आयोजकों ने नशाखोरी और सट्टेबाजी के खिलाफ जन-जागरूकता अभियान चलाने तथा युवाओं पर विशेष ध्यान देने की बात कही थी.
कार्यक्रम में जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय शामिल हुए. उन्होंने कहा कि जमशेदपुर सहित अन्य स्थानों पर नशा, सट्टेबाजी और विशेष रूप से ऑनलाइन सट्टेबाजी की समस्या गंभीर होती जा रही है. इसका असर केवल इसमें फंसने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका परिवार और पूरी युवा पीढ़ी प्रभावित होती है.

सरयू राय ने कहा कि प्रयास होना चाहिए कि युवा पीढ़ी को इन कुरीतियों की गिरफ्त में जाने से बचाया जाए. उन्होंने नशे और सट्टेबाजी के खिलाफ सामाजिक स्तर पर भी अभियान चलाने की जरूरत बताई.
पुलिस के आला अधिकारी शिकायतों को गंभीरता से लें: सरयू राय
सरयू राय ने पुलिस-प्रशासन से भी इस दिशा में प्रभावी कार्रवाई की अपेक्षा जताई. उन्होंने कहा कि सट्टा और ऑनलाइन सट्टेबाजी से संबंधित शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और पुलिस को इसके नेटवर्क तक पहुंचने के रास्ते तलाशने चाहिए. उन्होंने कहा कि ऑनलाइन सट्टेबाजी में मोबाइल और डिजिटल लिंक का इस्तेमाल होने के कारण नेटवर्क तक पहुंचना मुश्किल जरूर हो सकता है, लेकिन असंभव नहीं है. पुलिस यदि तकनीकी पहलुओं पर गंभीरता से काम करे तो ऐसे नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई संभव है. सरयू राय इससे पहले भी पुलिस से छोटे स्तर पर कार्रवाई तक सीमित न रहकर ड्रग्स और सट्टेबाजी के नेटवर्क तथा इसे संचालित करने वाले लोगों तक पहुंचने की मांग कर चुके हैं.
युवा पीढ़ी को बर्बाद होने से बचाना होगा
उन्होंने कहा कि नशा और ऑनलाइन सट्टा किसी एक परिवार या मोहल्ले की समस्या नहीं है. इससे युवा पीढ़ी प्रभावित होती है, इसलिए पुलिस कार्रवाई के साथ समाज को भी इसके खिलाफ खड़ा होना होगा.
सम्मेलन की पूर्व घोषित रूपरेखा में भी स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों और युवाओं के बीच जागरूकता, सोशल मीडिया अभियान और नुक्कड़ नाटक जैसे माध्यमों से नशे एवं सट्टेबाजी के दुष्प्रभावों की जानकारी पहुंचाने की योजना शामिल थी.
स्थानीय जनप्रतिनिधि भी बनाएं कुरीतियों के खिलाफ जनमत
सरयू राय ने नगर निकाय और पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों की भूमिका पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि नगर निगम, नगर पंचायत, पंचायत और जिला परिषद जैसी स्थानीय संस्थाएं सीधे जनता के बीच काम करती हैं. इसलिए उनके प्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्रों में नशा, सट्टेबाजी और दूसरी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जनमत तैयार करने में प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं. उन्होंने कहा कि स्थानीय निकायों का मूल दायित्व जनता तक सुविधाएं पहुंचाना और सेवक की भूमिका निभाना है. निर्वाचित प्रतिनिधियों को अपने क्षेत्र में ऐसी कुरीतियों के खिलाफ खड़े होने का साहस दिखाना चाहिए.
सम्मेलन के माध्यम से आयोजकों ने नशे और सट्टेबाजी के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के साथ व्यापक सामाजिक जागरूकता को जरूरी बताया. कार्यक्रम को लेकर पहले से शहर के कदमा, मानगो, बर्मामाइंस, बारीडीह और साकची सहित विभिन्न क्षेत्रों में तैयारियां और बैठकें की गई थीं.

