राष्ट्र संवाद संवाददाता
जादूगोड़ा राखा कॉपर प्लांट का विस्तार शुरू होते ही विवादों के घेरे में आ गया। फॉरेस्ट लैंड से सटे अधिग्रहित क्षेत्र में पोकलेन से जमीन समतल करते वक्त दर्जनों हरे-भरे पेड़ों को काट डाला गया। बस फिर क्या था, ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। ग्रामसभा ने मोर्चा खोलते हुए काम रुकवा दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि इस कंपनी का पुराना ट्रैक रिकॉर्ड भी साफ नहीं है, पहले भी इसके द्वारा इलाके का पानी दूषित किया जा चुका है।
प्रमुख ने मौके पर पहुंचकर दिया अल्टीमेटम
पेड़ कटने की खबर मिलते ही मुसाबनी प्रमुख रामदेव हेम्ब्रम टीम के साथ साइट पर पहुंचे और काम बंद कराया। उन्होंने दो टूक कहा, “यह इलाका रूआम ग्रामसभा के अंदर आता है। बिना ग्रामसभा की इजाजत के पेड़ काटना सीधा-सीधा कानून का उल्लंघन है। पहले पानी दूषित कर चुके हैं, अब जंगल उजाड़ रहे हैं। अगर नियम नहीं माने तो उग्र आंदोलन होगा।”
बड़ा रूआम में पंचायत, कंपनी के खिलाफ निंदा प्रस्ताव
घटना के बाद बड़ा रूआम गांव में ग्राम प्रधान बलराम माडी की अध्यक्षता में आपात बैठक बुलाई गई। बैठक में पेड़ कटाई की कड़ी निंदा की गई। ग्रामीणों ने कहा कि कंपनी मनमानी पर उतर आई है। बैठक में साईबा हेम्ब्रम, हाड़ी राम सोरेन, फंडा मुर्मू, सिकंदर हो, रघुनाथ हांसदा समेत सैकड़ों ग्रामीण मौजूद थे।
कंपनी की सफाई: वन विभाग से ली है परमिशन
इधर कंपनी प्रबंधन ने ग्रामसभा के आरोपों को सिरे से नकार दिया। कंपनी अधिकारी अभय पांडेय ने कहा, “अधिग्रहित जमीन पर काम के लिए ग्रामसभा की अनुमति जरूरी नहीं होती। हमने वन विभाग, रांची मुख्यालय से सारी मंजूरी ली है।”
25 साल बाद खुल रही बंद माइंस, रोजगार का दिया हवाला
अभय पांडेय ने बताया कि 25 साल से बंद पड़ी माइंस को दोबारा शुरू किया जा रहा है। अगले साल से तांबा अयस्क का उत्पादन होगा। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा। उन्होंने दावा किया कि कटे पेड़ों के बदले बड़े पैमाने पर पौधारोपण हो रहा है। 5 जून को पर्यावरण दिवस पर मेगा प्लांटेशन ड्राइव भी चलाएंगे।
क्या है बैकग्राउंड?
एचसीएल की राखा कॉपर प्लांट का विस्तार साउथ वेस्ट माइनिंग लिमिटेड कर रही है। भूमिगत खदानों को हवादार बनाने और डिकलाइन बनाने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि विस्तार के नाम पर पर्यावरण से खिलवाड़ हो रहा है। कंपनी पर पहले भी पानी दूषित करने के आरोप लग चुके हैं, जिससे लोगों में भारी नाराजगी है।
अब आगे क्या होगा?
ग्रामसभा काम बंद करने पर अड़ी है, जबकि कंपनी मंजूरी का हवाला दे रही है। ‘पानी दूषित करने’ के पुराने आरोपों के बाद अब ‘पेड़ कटाई’ से कंपनी और ग्रामीण आमने-सामने हैं। 25 साल बाद खुल रही माइंस फिलहाल विवादों की भेंट चढ़ती दिख रही है।

