राष्ट्र संवाद संवाददाता
यूसीआईएल में अधिकारियों द्वारा सरकारी एवं निजी वाहनों के बढ़ते उपयोग को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है। प्रधानमंत्री के आदेश का हो रहा है यूसिल में उल्लंघन। कर्मचारियों और स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि आखिर जब केंद्र सरकार लगातार ईंधन की बचत और अनावश्यक खर्च कम करने की अपील कर रही है, तब यूसीआईएल के विभिन्न परियोजना क्षेत्रों में वाहनों का उपयोग पहले की तुलना में इतना अधिक क्यों बढ़ गया है। जानकारी के अनुसार नरवा पहाड़, तुरामडीह और अन्य परियोजना क्षेत्रों से कई अधिकारी छोटी-छोटी बैठकों, फाइल कार्य या सामान्य कार्यालयी काम के लिए अलग-अलग गाड़ियों से जादूगोड़ा कार्यालय पहुंचते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले के प्रबंधन में कार पुलिंग की व्यवस्था लागू थी, जिसके तहत एक ही दिशा में जाने वाले अधिकारी एक वाहन का उपयोग करते थे। इससे तेल की बचत होती थी और कंपनी पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी कम पड़ता था।
लेकिन वर्तमान समय में स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है। आरोप है कि कई अधिकारी अपने अधीन अलग-अलग गाड़ियां रख रहे हैं और मामूली कार्यों के लिए भी अलग वाहन का उपयोग किया जा रहा है। इससे न केवल डीजल-पेट्रोल की खपत बढ़ रही है, बल्कि कंपनी के परिवहन खर्च पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ने की बात कही जा रही है।
कर्मचारियों के बीच यह भी चर्चा है कि यूसीआईएल जैसे सार्वजनिक उपक्रम को खर्च नियंत्रण और संसाधनों के बेहतर उपयोग का उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। लोगों का कहना है कि यदि एक समन्वित परिवहन नीति बनाई जाए और कार पुलिंग व्यवस्था को फिर से सख्ती से लागू किया जाए, तो लाखों रुपये की बचत संभव है।
क्षेत्र के कुछ लोगों ने यह भी मांग उठाई है कि कंपनी प्रबंधन वाहनों के उपयोग को लेकर स्पष्ट गाइडलाइन जारी करे तथा यह समीक्षा करे कि किन अधिकारियों को नियमित वाहन की वास्तविक आवश्यकता है और किन मामलों में साझा वाहन व्यवस्था लागू की जा सकती है।
हालांकि इस मामले में यूसीआईएल प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन बढ़ते वाहन उपयोग और ईंधन खर्च को लेकर कर्मचारियों तथा स्थानीय स्तर पर चर्चा लगातार तेज होती जा रही है।

