लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
गणेश प्रतिमा कारीगरों की चिंता
जमशेदपुर में गणेश चतुर्थी की तैयारियों के बीच लगातार हो रही बारिश ने मूर्तिकारों के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है। बारिश ने बढ़ाई गणेश प्रतिमा कारीगरों की चिंता, क्योंकि नमी के चलते मिट्टी की प्रतिमाएं समय पर सूख नहीं पा रही हैं।
मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक बारिश जारी रहने की संभावना है, जिससे मूर्तिकारों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। कारीगरों ने मांग की है कि उन्हें सूखे स्थान और बिजली की व्यवस्था मुहैया कराई जाए।
गणेश चतुर्थी का त्योहार न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति देता है। मूर्तिकला से जुड़े सैकड़ों परिवारों की आजीविका इस अवसर पर निर्भर करती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पारंपरिक मूर्तिकला को संरक्षित करने के लिए सरकार को कलाकारों को प्रशिक्षण, विपणन सहायता और वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करने चाहिए।
नमी के कारण प्रतिमाएं सुखाने में परेशानी, समय पर ऑर्डर पूरा करने में जुटे मूर्तिकार
राष्ट्र संवाद संवाददाता जमशेदपुर। 14 सितंबर को होने वाली गणेश चतुर्थी को लेकर शहर में तैयारियां जोर पकड़ चुकी हैं। विभिन्न इलाकों में पूजा समितियां पंडाल निर्माण और सजावट में जुटी हैं, वहीं लगातार बारिश ने गणेश प्रतिमा बनाने वाले मूर्तिकारों की परेशानी बढ़ा दी है। अत्यधिक नमी के कारण मिट्टी की प्रतिमाओं को समय पर सुखाना मुश्किल हो रहा है।
शहर के विभिन्न मूर्ति निर्माण केंद्रों में दिन-रात काम चल रहा है। मूर्तिकारों के अनुसार बारिश के चलते प्रतिमाओं की रंगाई और अंतिम रूप देने का काम भी प्रभावित हो रहा है। ऑर्डर समय पर पूरा करने के लिए उन्हें अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ रही है।
प्रतिमाओं को बारिश से बचाने और सुखाने के लिए प्लास्टिक शीट, टिन शेड, पंखे समेत अन्य वैकल्पिक साधनों का सहारा लिया जा रहा है। हालांकि मौसम की अनिश्चितता अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
मूर्तिकारों ने बताया कि कच्चे माल, रंग और परिवहन की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि प्रतिमाओं की कीमतों में अपेक्षित वृद्धि नहीं हो रही। इसके अलावा स्थायी स्थान नहीं मिलने के कारण हर वर्ष अस्थायी व्यवस्था करनी पड़ती है।
कारीगरों ने यह भी चिंता जताई कि कठिन मेहनत और सीमित आमदनी के कारण नई पीढ़ी इस पारंपरिक कला से दूर होती जा रही है। इससे भविष्य में मूर्तिकला के संरक्षण पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
गणेश चतुर्थी को लेकर शहर में उत्साह के बीच मूर्तिकार 13 सितंबर तक प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। अब मौसम की चुनौती के बीच समय पर प्रतिमाएं तैयार करना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
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इस प्रकार, बारिश की मार झेल रहे मूर्तिकारों को सरकारी सहायता और स्थायी कार्यस्थल की आवश्यकता है ताकि यह पारंपरिक कला जीवित रह सके। प्रशासन को चाहिए कि कच्चे माल की कीमतों पर नियंत्रण करे और कारीगरों को उचित मंच प्रदान करे।

