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    Home » रहबर फाउंडेशन ने 100 जरूरतमंदों को बांटे फल-सब्जी के ठेले, स्वरोजगार को मिला बढ़ावा
    कारोबार जमशेदपुर झारखंड

    रहबर फाउंडेशन ने 100 जरूरतमंदों को बांटे फल-सब्जी के ठेले, स्वरोजगार को मिला बढ़ावा

    Devanand SinghBy Devanand SinghJuly 29, 2026No Comments3 Mins Read
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    रहबर फाउंडेशन
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    लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता

    रहबर फाउंडेशन ने जमशेदपुर के जुगसलाई स्थित ईदगाह मैदान में एक भव्य कार्यक्रम आयोजित कर 100 जरूरतमंद परिवारों को स्वरोजगार के साधन उपलब्ध कराए। इस पहल के तहत लाभार्थियों को फल एवं सब्जी के ठेले, इलेक्ट्रॉनिक तराजू और कारोबार शुरू करने के लिए आवश्यक पूंजी सामग्री वितरित की गई। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गरीब एवं बेरोजगार तबके को आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें सम्मानजनक आजीविका प्रदान करना है।

    रहबर फाउंडेशन की पहल से बदली जिंदगियां

    झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष हिदायतुल्लाह खान के प्रयास से रहबर फाउंडेशन ने जुगसलाई के ईदगाह मैदान में आयोजित कार्यक्रम में 100 जरूरतमंद लोगों को फल एवं सब्जी के ठेले, तराजू और कारोबार शुरू करने का आवश्यक सामान वितरित किया। उद्देश्य जरूरतमंदों को आत्मनिर्भर बनाकर सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराना रहा।

    कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और उनकी भूमिका

    कार्यक्रम में बिहार अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष गुलाम रसूल बलियावी, डॉ. गुलाम जरकानी, रहबर फाउंडेशन के अल्लामा रोशन जमीर सहित कई सामाजिक एवं धार्मिक हस्तियां मौजूद रहीं। वक्ताओं ने कहा कि स्थायी रोजगार उपलब्ध कराना सबसे बड़ी सामाजिक सेवा है और इस तरह की पहल गरीब एवं बेरोजगार लोगों के लिए नई उम्मीद की किरण है।

    लाभार्थियों को मिला प्रोत्साहन और उर्स का आयोजन

    इस अवसर पर लाभार्थियों को मेहनत और ईमानदारी से व्यवसाय करने के लिए प्रेरित किया गया। वहीं क़ायदे मिल्लत अल्लामा अरशद कादरी रहमतुल्लाह अलैह के 25वें सालाना उर्स के अवसर पर लंगर का वितरण, विशेष दुआ तथा सलात व सलाम भी पेश किया गया।

    स्वरोजगार की दिशा में मील का पत्थर

    यह आयोजन केवल सामग्री वितरण तक सीमित नहीं था, बल्कि यह एक सामाजिक क्रांति का आगाज था। हिदायतुल्लाह खान ने अपने संबोधन में जोर देकर कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए गैर-सरकारी संगठनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि झारखंड अल्पसंख्यक आयोग लगातार ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से वंचित वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास कर रहा है। 100 ठेलों का वितरण एक सांकेतिक शुरुआत है, जिसे भविष्य में अन्य जिलों तक विस्तारित किया जाएगा।

    बिहार अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष गुलाम रसूल बलियावी ने इस मॉडल की सराहना करते हुए कहा कि “किसी को मछली देने के बजाय मछली पकड़ना सिखाना ही सच्ची सेवा है।” उन्होंने बिहार में भी इसी तर्ज पर कार्यक्रम चलाने की इच्छा जताई। डॉ. गुलाम जरकानी ने लाभार्थियों को बैंकिंग सुविधाओं और मुद्रा लोन योजनाओं से जोड़ने की बात कही, ताकि उनका कारोबार छोटे स्तर से आगे बढ़ सके।

    सामाजिक प्रभाव और भविष्य की योजनाएं

    अल्लामा रोशन जमीर ने रहबर फाउंडेशन की ओर से आश्वासन दिया कि संस्था लाभार्थियों का हैंडहोल्डिंग करेगी। उन्हें मार्केट लिंकेज, गुणवत्तापूर्ण सामान की खरीद और साफ-सफाई के मानकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। कार्यक्रम में उपस्थित स्थानीय पार्षद और प्रशासनिक अधिकारियों ने हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया।

    इस अवसर पर क़ायदे मिल्लत अल्लामा अरशद कादरी के 25वें उर्स पर आयोजित लंगर में सैकड़ों लोगों ने शिरकत की, जिससे सामाजिक सौहार्द का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत हुआ। विशेष दुआ में मुल्क की तरक्की, अमन-चैन और बेरोजगारी दूर होने की प्रार्थना की गई।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सूक्ष्म उद्यमिता को बढ़ावा देने का यह मॉडल ग्रामीण और शहरी गरीबी उन्मूलन में कारगर साबित हो सकता है। भारत सरकार की एमएसएमई मंत्रालय की योजनाएं भी ऐसे जमीनी प्रयासों से जुड़कर अधिक प्रभावी हो सकती हैं।

    अंत में, लाभार्थियों के चेहरों पर आई मुस्कान और उनकी आंखों में नए सपने इस बात की गवाही दे रहे थे कि यह पहल केवल ठेले बांटने तक सीमित नहीं, बल्कि सम्मान और स्वाभिमान बांटने का जरिया बनी है।

    अल्पसंख्यक आयोग रहबर फाउंडेशन स्वरोजगार
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