लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
विश्व टाइगर दिवस के अवसर पर जमशेदपुर के टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क में भव्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बाघ संरक्षण के प्रति जनमानस विशेषकर युवा पीढ़ी को जागरूक करना था।
विश्व टाइगर दिवस पर जागरूकता की पहल
जमशेदपुर: विश्व टाइगर दिवस के अवसर पर बुधवार को टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क में जागरूकता एवं पर्यावरण संरक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्वी सिंहभूम की प्रभागीय वन पदाधिकारी (डीएफओ) सबा आलम शामिल हुईं। इस अवसर पर शहर के विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डीएफओ सबा आलम ने कहा कि बाघ जंगलों की जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने बच्चों से वन्यजीवों और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक रहने तथा प्रकृति के संरक्षण में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
विश्व टाइगर दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम के दौरान विभिन्न स्कूलों के बच्चों ने जूलॉजिकल पार्क परिसर में वृक्षारोपण किया। इसके साथ ही उन्हें बाघों के प्राकृतिक आवास, उनके संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों तथा वन्यजीव संरक्षण के महत्व की विस्तृत जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का उद्देश्य नई पीढ़ी में पर्यावरण संरक्षण, वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना था। इस अवसर पर टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क के अधिकारी, वन विभाग के कर्मचारी, शिक्षक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
बाघ संरक्षण का वैश्विक महत्व और प्रोजेक्ट टाइगर
विश्व टाइगर दिवस प्रतिवर्ष 29 जुलाई को मनाया जाता है ताकि बाघों के संरक्षण के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाई जा सके। भारत में प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत 1973 में हुई थी और तब से बाघों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। नवीनतम गणना के अनुसार भारत में बाघों की आबादी 3000 से अधिक हो चुकी है जो वैश्विक बाघ आबादी का लगभग 70 प्रतिशत है। यह सफलता राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के सतत प्रयासों का परिणाम है। बाघ पारिस्थितिकी तंत्र के शीर्ष शिकारी होते हैं और उनका संरक्षण पूरे जंगल के स्वास्थ्य को दर्शाता है।
टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क की भूमिका
टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क जमशेदपुर का एक प्रमुख जैव विविधता केंद्र है। यह पार्क न केवल मनोरंजन का स्थल है बल्कि वन्यजीव शिक्षा और संरक्षण प्रजनन कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लेता है। पार्क प्रबंधन द्वारा नियमित रूप से स्कूली बच्चों के लिए शैक्षिक भ्रमण और जागरूकता सत्र आयोजित किए जाते हैं। इस वर्ष के कार्यक्रम ने पार्क की प्रतिबद्धता को और मजबूत किया है।
डीएफओ सबा आलम का युवाओं को संदेश
पूर्वी सिंहभूम की डीएफओ सबा आलम ने अपने संबोधन में जोर देकर कहा कि वनों की रक्षा बिना जनभागीदारी के संभव नहीं है। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे अपने आस-पास के वातावरण के प्रति संवेदनशील बनें और किसी भी प्रकार के वन्यजीव अपराध की सूचना तुरंत वन विभाग को दें। उनके इस प्रेरक उद्बोधन ने उपस्थित सभी छात्रों और शिक्षकों में नई ऊर्जा का संचार किया।
नई पीढ़ी में पर्यावरण चेतना का विकास
कार्यक्रम में भाग लेने वाले विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने वृक्षारोपण कर न केवल पर्यावरण के प्रति अपना दायित्व निभाया बल्कि बाघों के आवास संरक्षण की व्यावहारिक समझ भी हासिल की। शिक्षकों का मानना है कि ऐसे व्यावहारिक आयोजन पाठ्यक्रम की किताबी ज्ञान से कहीं अधिक प्रभावी होते हैं। इस पहल से भविष्य के जिम्मेदार नागरिक तैयार करने में मदद मिलेगी।
अंत में, टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क के निदेशक ने सभी अतिथियों, वन अधिकारियों, शिक्षकों और छात्रों का आभार व्यक्त किया और आश्वासन दिया कि भविष्य में भी ऐसे आयोजन निरंतर जारी रहेंगे ताकि विश्व टाइगर दिवस का संदेश जन-जन तक पहुंच सके।

