यूसीआईएल में तबादले-पदस्थापन पर उठे सवाल, सुदीप्तो दास की फाइल पर ‘दबाव’ की चर्चा
राष्ट्र संवाद संवाददाता
यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) के चेयरमैन सह मैनेजिंग डायरेक्टर एस.के. सतपति द्वारा 24 जून को जारी स्थानांतरण और पदस्थापन आदेश (क्रमांक UCIL/CORP/193) पर अब कई तरह के सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि इस आदेश में योग्यता की अनदेखी करते हुए विवादित और भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों को जिम्मेदार पदों पर बैठाया गया है, जबकि योग्य अधिकारियों को हाशिए पर डाल दिया गया है।

तबादलों में अनदेखी और विद्वेष के आरोप
जादूगोड़ा स्थित डीजीएम (परचेज) एस.के. बर्मन का तबादला डीजीएम (मिल), तुमलापल्ली किया गया है। बर्मन को एक योग्य और निष्पक्ष अधिकारी माना जाता है, लेकिन उनके तबादले को विद्वेषपूर्ण बताया जा रहा है। इसी प्रकार डॉ. पी.के. तमराकर, चीफ सुपरिंटेंडेंट (मिल), तुरामडीह और सी.बी. सिंह, डिप्टी सुपरिंटेंडेंट (फिजिक्स) का भी स्थानांतरण किया गया है, जबकि उनके कार्यकाल के दौरान संस्था के हित में किए गए योगदानों का उल्लेख उनके अभिलेखों में मौजूद है।

सुदीप्तो दास की वापसी पर सबसे बड़ा विवाद
तबादला सूची में सबसे अधिक विवाद सुदीप्तो दास को लेकर है। दास, जो पहले परचेज डिपार्टमेंट में कार्यरत थे, उन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लग चुके हैं। केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC), नई दिल्ली ने 25 फरवरी 2006 को पत्र क्रमांक 2024/ATM/DAE/VIG CASE/322 के माध्यम से उनके खिलाफ मेजर पेनल्टी की अनुशंसा की थी। इसके बाद उन्हें किसी भी संवेदनशील पद पर नहीं बैठाने की अनुशंसा की गई थी। बावजूद इसके, उन्हें फिर से परचेज डिपार्टमेंट में नियुक्त किया गया है, जिससे विभागीय निष्पक्षता और पारदर्शिता पर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।

आदेश में पारदर्शिता पर उठे सवाल
आरोप है कि यह आदेश अधीनस्थ अधिकारियों की अनुशंसा और कथित समीकरणों के आधार पर पारित किया गया है, न कि पारदर्शी और प्रशासनिक मापदंडों पर। कई अधिकारी ऐसे हैं जिन्हें महत्त्वहीन पदों पर भेजा गया है, जिससे यूसीआईएल की प्रशासनिक क्षमता प्रभावित हो सकती है और भ्रष्टाचार को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा मिल सकता है।

कार्यकाल की समाप्ति के समय जारी हुआ आदेश
चेयरमैन एस.के. सतपति का कार्यकाल समाप्त होने की कगार पर है और उनके स्थान पर डॉ. कंचम आनंदराव की नियुक्ति की जा चुकी है। ऐसे समय में जारी स्थानांतरण आदेशों को लेकर सवाल और भी गहरे हो गए हैं। कर्मचारियों और यूनियन प्रतिनिधियों की ओर से यह मांग की जा रही है कि यह आदेश अविलंब निरस्त किया जाए और स्थानांतरण प्रक्रिया को पुनः निष्पक्षता के साथ संपन्न किया जाए।


