जादूगोड़ा का कथित खनन माफिया प्रदीप अग्रवाल और खनन विभाग के बीच साठगांठ पर उठे सवाल, जांच हुई तो खुल सकते हैं बड़े राज
राष्ट्र संवाद विशेष संवाददाता
जमशेदपुर:पूर्वी सिंहभूम जिले के जादूगोड़ा क्षेत्र में अवैध खनन को लेकर लंबे समय से चर्चा में रहे कथित खनन माफिया प्रदीप अग्रवाल और खनन विभाग के बीच कथित गठजोड़ एक बार फिर सवालों के घेरे में है। हाल ही में उपायुक्त के निर्देश पर जमशेदपुर के कुछ हिस्सों में खनन विभाग ने कार्रवाई जरूर की, लेकिन प्रदीप अग्रवाल जैसे बड़े नाम पर खनन विभाग उपायुक्त को भी अंधेरे में रखकर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया , जिससे विभाग की मंशा पर सवाल उठने लगे हैं।

क्या हुई अवैध खनन और भारी वाहनों की जांच?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रदीप अग्रवाल द्वारा किए जा रहे खनन और भारी वाहनों के अवैध परिचालन की जांच अब तक क्यों नहीं हुई? सूत्रों के अनुसार, जादूगोड़ा, मुसाबनी और पोटका क्षेत्र में बड़ी संख्या में खनन वाहन बिना वैध परमिट और ओवरलोडिंग के साथ परिचालित होते हैं, जिससे न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान हो रहा है, बल्कि सड़कें भी बर्बाद हो रही हैं।

सूत्रों की माने तो एक वरिष्ठ नेता के दबाव में 10 करोड़ की लागत से प्रस्तावित सड़क योजना में पुल निर्माण की स्वीकृति रद्द करवा दी गई, ताकि खनन माफिया का रास्ता साफ रहे और अवैध वाहनों की निर्बाध आवाजाही बनी रहे। सवाल उठ रहे हैं कि 10 करोड़ की योजना में पुलिया को क्यों किया नजरअंदाज?
*खनन विभाग क्यों है मेहरबान?*

प्रदीप अग्रवाल पर खनन विभाग की मेहरबानी किसी से छुपी नहीं है। वर्ष 2020 से 2023 तक के कार्यकाल में खनन पदाधिकारी रहे एक अधिकारी से उसके निकट संबंध रहे हैं। इन रिश्तों के चलते कई बार जांच की फाइलें या तो दबा दी गईं या फिर खानापूर्ति कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
उच्चस्तरीय जांच की मांग

स्थानीय सामाजिक संगठनों और क्षेत्रीय लोगों ने इस मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच हुई, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। इसमें न केवल खनन विभाग के अधिकारियों की भूमिका उजागर होगी, बल्कि राजनीतिक संरक्षण का सच भी सामने आ सकता है।

बहरहाल कथित खनन माफिया और सरकारी विभागों के गठजोड़ से न केवल राजस्व को भारी नुकसान हो रहा है, बल्कि पर्यावरण और स्थानीय विकास भी प्रभावित हो रहा है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले पर क्या ठोस कदम उठाता है, या फिर यह भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दफन होकर रह जाएगा।

