Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » बंगाल की राजनीति और चुनावी हिंसा: लोकतंत्र की कसौटी | राष्ट्र संवाद
    Headlines राजनीति राष्ट्रीय संपादकीय

    बंगाल की राजनीति और चुनावी हिंसा: लोकतंत्र की कसौटी | राष्ट्र संवाद

    Devanand SinghBy Devanand SinghMay 5, 2026No Comments2 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    जनप्रतिनिधियों की त्याग भावना
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    हिंसा पर बदलते सुर: बंगाल की राजनीति और लोकतंत्र की कसौटी

    देवानंद सिंह
    पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनावी हिंसा कोई नई बात नहीं है, लेकिन जो बदलता रहा है, वह है राजनीतिक दलों का रुख। 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद जब राज्य में हिंसा, तोड़फोड़ और प्रतिशोध की घटनाएं सामने आई थीं, तब तृणमूल कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगे थे और विपक्ष ने कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए थे। उस समय सख्त कार्रवाई और निष्पक्षता की मांग जोर-शोर से की गई थी।
    आज, जब हालिया चुनावों के बाद फिर हिंसा की खबरें सामने आ रही हैं, तो वही तृणमूल कांग्रेस इन घटनाओं को लेकर चिंता जता रही है और कार्रवाई की मांग कर रही है। यह बदलाव केवल बयानबाजी का नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति के उस दोहरे मानदंड को उजागर करता है, जहां सत्ता और विपक्ष की भूमिका के साथ नैतिकता का पैमाना भी बदल जाता है।
    लोकतंत्र में यह प्रवृत्ति खतरनाक है। हिंसा चाहे किसी भी दल के समर्थकों द्वारा हो, उसका समर्थन या मौन स्वीकृति समान रूप से गलत है। यदि 2021 में हिंसा अस्वीकार्य थी, तो आज भी है और यदि आज इसकी निंदा की जा रही है, तो वही कसौटी हर दौर में लागू होनी चाहिए। राजनीतिक दलों की विश्वसनीयता इसी निरंतरता से तय होती है।

    बंगाल की राजनीति

    यह भी स्पष्ट है कि चुनावी जीत का उत्सव यदि हिंसा में बदल जाए, तो वह जनादेश का अपमान बन जाता है। राज्य की मशीनरी की जिम्मेदारी है कि वह बिना किसी राजनीतिक दबाव के कानून का राज स्थापित करे। साथ ही, सभी दलों को अपने कार्यकर्ताओं को संयम और लोकतांत्रिक मर्यादा का पाठ पढ़ाना होगा।
    ममता बनर्जी और अन्य नेताओं के लिए यह एक अवसर भी है यह दिखाने का कि वे केवल आरोप लगाने तक सीमित नहीं, बल्कि शासन में निष्पक्षता और शांति सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यदि ऐसा नहीं होता, तो हिंसा पर बदलते सुर केवल राजनीतिक सुविधा का प्रतीक बनकर रह जाएंगे।
    लोकतंत्र की असली परीक्षा चुनाव परिणामों में नहीं, बल्कि उसके बाद के आचरण में होती है। सिद्धांतों की स्थिरता ही राजनीति को विश्वसनीय बनाती है और यही आज सबसे बड़ी जरूरत है।

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleदैनिक पंचांग एवं राशिफल: ६ मई २०२६ (बुधवार)
    Next Article लोकतंत्र की मर्यादा और चुनावी विश्वास का संकट | राष्ट्र संवाद

    Related Posts

    लोकसभा में हिरोशिमा और नागासाकी के पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी गई

    August 6, 2026

    बंबई उच्च न्यायालय ने 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में तरुण तेजपाल को दोषी ठहराया

    August 6, 2026

    रेल कर्मचारियों के 21 साल से बड़े बच्चों को भी मुफ्त चिकित्सा का मिलेगा लाभ, बोर्ड ने जारी किये आदेश

    August 6, 2026

    Comments are closed.

    अभी-अभी

    लोकसभा में हिरोशिमा और नागासाकी के पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी गई

    बंबई उच्च न्यायालय ने 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में तरुण तेजपाल को दोषी ठहराया

    रेल कर्मचारियों के 21 साल से बड़े बच्चों को भी मुफ्त चिकित्सा का मिलेगा लाभ, बोर्ड ने जारी किये आदेश

    यूपी में बड़ा हादसा : प्रतापगढ़ में बारिश के दौरान ढहा घर, एक ही परिवार के छह सदस्यों की मौत

    दिल्ली में झमाझम बारिश, उमस से राहत; ‘ऑरेंज’ अलर्ट जारी

    झारखंड में छात्रों का विरोध-प्रदर्शन तेज, मुख्यमंत्री सोरेन ने बातचीत की पेशकश की

    रुपया शुरुआती कारोबार में डॉलर के मुकाबले नौ पैसे टूटकर 95.17 पर

    उत्तराखंड में लगातार बारिश से नदियां उफान पर, खतरे के निशान पर पहुंचीं

    सिद्धिविनायक मंदिर दान घोटाले पर बड़ा एक्शन, 5 साल के चढ़ावे का होगा ऑडिट, 9 गिरफ्तार, 46 कर्मचारी निलंबित

    Meta ने पीएम मोदी का वीडियो डिलीट करने के लिए मांगी माफी, संसदीय समिति ने दिया था 48 घंटे का अल्टीमेटम

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.