नीरज सिंह की कार्यशैली पर उठे सवाल, संध्या सिंह की उम्मीदवारी पर छाया सियासी साया ! अमन शांडिल्य
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर: नगर निकाय चुनाव के नतीजों से पहले ही भाजपा खेमे में अंदरूनी चर्चा तेज हो गई है। भाजपा नेता नीरज सिंह की कार्यशैली और उनके राजनीतिक व्यवहार को लेकर पार्टी के भीतर और बाहर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि बीते चार वर्षों में नीरज सिंह ने लगभग 400 विरोधी तैयार कर लिए, जिसका असर चुनाव परिणाम पर पड़ सकता है।
स्थानीय कार्यकर्ताओं का मानना है कि इस चुनाव में मैदान में भले ही संध्या सिंह थीं, लेकिन रणनीतिक रूप से चुनाव की कमान विनोद राय के हाथों में दिखाई दी। यही कारण है कि मतदाताओं के बीच भ्रम की स्थिति बनी रही और अपेक्षित जनसमर्थन का स्पष्ट माहौल नहीं बन सका।
चुनाव प्रचार के दौरान जिस तरह आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला और सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुए, उससे भी राजनीतिक वातावरण प्रभावित हुआ। यह भी कहा जा रहा है कि नीरज सिंह की पहुंच पार्टी के बड़े नेताओं तक तो थी, लेकिन जमीनी कार्यकर्ताओं से उनकी दूरी साफ नजर आई। कई कार्यकर्ताओं ने अनौपचारिक बातचीत में इस बात को स्वीकार किया कि स्थानीय स्तर पर संवाद की कमी महसूस की गई।
राजनीति में एक पुरानी कहावत प्रचलित है कि बड़े व्यक्ति तक पहुंचने के लिए पहले उसके नजदीकी दायरे से गुजरना पड़ता है। इसी संदर्भ में कुछ लोग यह टिप्पणी कर रहे हैं कि संगठन में समन्वय और संवाद की कड़ी कमजोर रही, जिसका असर चुनावी रणनीति पर पड़ा।
मतदान के दौरान क्षेत्र की जनता के रुख को देखते हुए राजनीतिक विश्लेषकों का अनुमान है कि परिणाम उम्मीद के विपरीत भी हो सकते हैं। हालांकि, अगर परिणाम अनुकूल आता है तो इसे पूरी तरह संध्या सिंह की व्यक्तिगत छवि और जनसंपर्क का परिणाम माना जाएगा। वहीं, यदि परिणाम प्रतिकूल रहा तो इसकी राजनीतिक जिम्मेदारी स्थानीय से लेकर केंद्रीय नेतृत्व तक पर तय होने की चर्चा भी शुरू हो गई है।
अब सभी की निगाहें मतगणना पर टिकी हैं, जहां यह साफ हो जाएगा कि जनता ने किसे अपना समर्थन दिया है और किसे अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करना होगा।

