रिपोर्ट – अमन ओझा (ब्यूरो चीफ, कोल्हान)
झारखंड में नगर निकाय, नगर परिषद एवं नगर पंचायत चुनाव अब संपन्न हो चुके हैं और राज्यभर में 16 मार्च को सभी नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों को शपथ दिलाई जाएगी। संबंधित जिलों के उपायुक्तों की मौजूदगी में वार्ड पार्षद, वार्ड सदस्य, महापौर, उपमहापौर, अध्यक्ष और उपाध्यक्ष एक साथ पद की शपथ लेंगे। हालांकि राज्य में कई स्थानों पर उपमहापौर और उपाध्यक्ष का चुनाव नहीं होने के कारण शपथ ग्रहण प्रक्रिया में थोड़ी देरी होने की संभावना जताई जा रही है। इस बीच सूत्रों के हवाले से खबर है कि आदित्यपुर नगर निगम के नगर आयुक्त ने संवेदकों को हिदायत दी है कि जब तक महापौर, उपमहापौर और वार्ड पार्षदों का शपथ ग्रहण नहीं हो जाता, तब तक वे नगर निगम से अपने-अपने लंबित भुगतानों को जल्द प्राप्त कर लें। बताया जा रहा है कि शपथ के बाद जब नए जनप्रतिनिधि पदभार संभालेंगे तो धरातल पर हुए विकास कार्यों—जैसे सड़क, नाली आदि—की समीक्षा और जांच की जा सकती है। ऐसे में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या त्रुटि पाए जाने पर संवेदकों के भुगतान पर रोक लगाने की पहल भी की जा सकती है। जनप्रतिनिधियों ने इस पूरे मामले पर संज्ञान लेते हुए मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का ध्यान आकृष्ट कराने की बात कही है और मांग की है कि जमीनी स्तर पर हुए कार्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। आरोप है कि कई वार्डों में सड़क और नाली का निर्माण बिना विधिवत शिलान्यास के ही करा दिया गया, जबकि नियम के अनुसार शिलान्यास शिलापट्ट पर मुख्यमंत्री, सांसद, विधायक और संवेदक का नाम तथा एकरारनामा अंकित होना अनिवार्य होता है। इसके बावजूद कई जगह इन नियमों को दरकिनार कर कार्य कराए जाने की चर्चा से नगर निगम क्षेत्र में सवाल उठने लगे हैं।

