मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर दिल्ली में रविवार को लगातार तीसरे दिन प्रदर्शन जारी रहा. दिनभर चले प्रदर्शनों के दौरान जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों से करीब 700 लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई है. इनमें AAP नेताओं के साथ AISA, SFI, NSUI और अन्य छात्र संगठनों के कार्यकर्ता शामिल हैं.
रविवार को इंडिया गेट से जंतर-मंतर तक दो मार्च प्रस्तावित थे. AISA के नेतृत्व में Citizens’ March दोपहर 3 बजे और भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) का मार्च शाम 5 बजे प्रस्तावित था. पुलिस ने दोनों मार्च को अनुमति नहीं दी थी. इसके बावजूद प्रदर्शनकारी अलग-अलग रास्तों से जंतर-मंतर की ओर बढ़े. पुलिस ने भारी बैरिकेडिंग कर उन्हें रोकने की कोशिश की और कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया.
दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के लिए करीब 5,000 जवान तैनात किए थे. इनमें रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और अन्य अर्धसैनिक बल भी शामिल थे. जंतर-मंतर की ओर जाने वाली सड़कों पर बैरिकेडिंग के साथ PCR वैन और अन्य पुलिस वाहन लगाए गए. CCTV के जरिए निगरानी की गई और जरूरत पड़ने पर ड्रोन के इस्तेमाल की व्यवस्था भी रखी गई.
रविवार के प्रदर्शन के दौरान AAP दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज को भी हिरासत में लिया गया. उन्होंने पुलिस पर अपने साथ बदसलूकी का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें उठाकर इधर-उधर फेंका गया. वहीं AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को भी प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया और बाद में उन्हें छोड़ दिया गया. AISA की ओर से आरोप लगाया गया कि उन्हें बिना नंबर वाली निजी गाड़ी में ले जाया गया और वाहन में कोई महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी. हालांकि, दिल्ली पुलिस के शीर्ष अधिकारी ने इस दावे से इनकार किया है.
प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प की भी खबर है. कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड पार करने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें रोकने की कार्रवाई की. एक पुलिस वाहन की खिड़की टूटने की घटना भी सामने आई.
इससे पहले शनिवार को भी करीब 150 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था. इनमें वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण, कपिल सिब्बल, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और नेहा बोरा समेत कई लोग शामिल थे. शुक्रवार को भी जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया था.
प्रदर्शन के दौरान महिला सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा. तीन महिला पत्रकारों ने आरोप लगाया कि 3 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर कवरेज के दौरान दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने उनके साथ यौन दुर्व्यवहार किया. दिल्ली पुलिस ने रविवार को कहा कि तीनों शिकायतों को क्राइम ब्रांच को निष्पक्ष जांच के लिए भेज दिया गया है.
एक महिला पत्रकार ने एक ACP पर गंभीर आरोप लगाए हैं. पत्रकार का दावा है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई रिकॉर्ड करते समय अधिकारी ने उनके साथ अनुचित व्यवहार किया. इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मामले की जांच अब क्राइम ब्रांच करेगी.
मामले को लेकर प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने भी पुलिस कार्रवाई पर चिंता जताई है. संगठन ने कहा कि पत्रकारों को बिना डर के अपना काम करने दिया जाना चाहिए और प्रदर्शन की कवरेज के दौरान उनके साथ आक्रामक व्यवहार नहीं होना चाहिए.
प्रदर्शनों के बीच दिल्ली पुलिस ने पहले ही जंतर-मंतर और नई दिल्ली जिले में निषेधाज्ञा लागू कर रखी थी. शुक्रवार के प्रदर्शन को लेकर पुलिस ने तीन FIR भी दर्ज की थीं. इनमें दो मामले संसद मार्ग और एक मामला कनॉट प्लेस थाने में दर्ज हुआ था.
विरोध प्रदर्शन की मुख्य वजह SIR को लेकर चुनाव आयोग पर उठे सवाल हैं. द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR से जुड़े फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर 10 महीनों में कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज की थीं. चुनाव आयोग ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि SIR समेत महत्वपूर्ण फैसले पूर्ण आयोग ने सर्वसम्मति से लिए हैं.
इस बीच देश के अन्य हिस्सों में भी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन हुए हैं. मुंबई में शिवसेना (UBT) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के नेताओं ने संयुक्त रूप से प्रदर्शन किया और SIR वापस लेने तथा CEC के इस्तीफे की मांग उठाई.
रविवार देर शाम तक दिल्ली में स्थिति तनावपूर्ण बनी रही. जंतर-मंतर की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव तथा हिरासत का सिलसिला जारी रहा, जबकि प्रदर्शनकारी CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR को लेकर जवाबदेही की मांग पर कायम हैं.

