बजट में रोजगार के वादे, लेकिन जमीनी हकीकत शून्य: अरविंद सिंह बिट्टू
पेपर लीक और भर्ती घोटालों से युवाओं का भरोसा टूटा, सरकारी नौकरी की आस में सड़कों पर हैं अभ्यर्थी
राष्ट्र संवाद संवाददाता
रांची/जमशेदपुर: झारखंड सरकार द्वारा वित्त वर्ष 2026–27 का बजट विधानसभा में पेश किए जाने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया है। बजट में रोजगार और युवाओं के लिए नई योजनाओं की घोषणाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए अरविंद सिंह बिट्टू ने सरकार पर तीखा हमला बोला है।
अरविंद सिंह बिट्टू ने कहा कि सरकार हर साल बजट भाषण में रोजगार सृजन और युवाओं के सशक्तिकरण की बड़ी-बड़ी बातें करती है, लेकिन धरातल पर परिणाम शून्य नजर आते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के हजारों युवा आज भी सरकारी नौकरी की आस में सड़कों पर आंदोलन करने को मजबूर हैं।
उन्होंने कहा, “युवाओं को रोजगार देने के बजाय सरकार केवल घोषणाओं का पुलिंदा पेश करती है। भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और घोटालों की घटनाओं ने युवाओं का भरोसा पूरी तरह तोड़ दिया है। जब तक पारदर्शी और समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक बजट में किए गए वादों का कोई मतलब नहीं है।”
बिट्टू ने यह भी कहा कि राज्य में कई विभागों में हजारों पद रिक्त पड़े हैं, लेकिन नियुक्ति प्रक्रिया वर्षों से लंबित है। इससे प्रशासनिक कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं और युवाओं में निराशा बढ़ रही है। उन्होंने सरकार से मांग की कि लंबित नियुक्तियों की त्वरित प्रक्रिया शुरू की जाए और भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सख्त कानून लागू किया जाए।
हालांकि सरकार का दावा है कि बजट में कौशल विकास, स्वरोजगार और उद्योगों के माध्यम से बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की दिशा में ठोस प्रावधान किए गए हैं। अब देखना होगा कि बजट में की गई घोषणाएं किस हद तक धरातल पर उतर पाती हैं।
राज्य की राजनीति में बजट को लेकर बहस तेज हो गई है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर पक्ष-विपक्ष के बीच और तीखी बयानबाजी देखने को मिल सकती है।

