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    Home » निजी स्कूलों को फीस बढ़ोतरी के लिए लेनी होगी अनुमति : हाइकोर्ट
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    निजी स्कूलों को फीस बढ़ोतरी के लिए लेनी होगी अनुमति : हाइकोर्ट

    Devanand SinghBy Devanand SinghMay 14, 2019No Comments2 Mins Read
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    रांची : निजी स्कूलों में 10 फीसदी से अधिक फीस बढ़ोतरी करने के लिए झारखंड हाइकोर्ट से अनुमति लेनी होगी. सोमवार को निजी स्कूलों में फीस बढ़ोतरी के मामले में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाइकोर्ट ने उक्त अंतरिम आदेश पारित किया. चीफ जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस प्रशांत कुमार की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की. खंडपीठ ने कहा कि वर्तमान में स्कूलों में जो फीस तय है, उसमें विद्यालयस्तरीय समिति हस्तक्षेप नहीं करेगी. यदि स्कूल प्रबंधन फीस वृद्धि करना चाहता है , तो उसे विद्यालयस्तरीय समिति को प्रस्ताव देना होगा. यदि उक्त समिति 10% से अधिक फीस बढ़ाने का निर्णय लेती है, तो उसे हाइकोर्ट से अनुमति लेनी होगी. खंडपीठ ने राज्य सरकार को जवाब देने का निर्देश दिया. मामले की अगली सुनवाई दो जुलाई को होगी.
    इससे पूर्व प्रार्थी की अोर से अधिवक्ता सुमित गड़ोदिया ने खंडपीठ को बताया कि सरकार की अधिसूचना सही नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में कहा था कि स्कूल अपना फीस स्वयं तय कर सकता है. सरकार अपना नियंत्रण रख सकती है. सरकार को फीस तय करने का अधिकार नहीं है. उल्लेखनीय है कि प्रार्थी डीवीएमएस पब्लिक स्कूल, कदमा (जमशेदपुर) ने याचिका दायर कर सरकार की अधिसूचना को चुनाैती दी है. सरकार ने सात जनवरी 2019 को अधिसूचना जारी की थी.

    क्या है सरकार की अधिसूचना मेंं : राज्य सरकार ने सात जनवरी 2019 को अधिसूचना जारी कर झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण अधिनियम (जेट) में एक प्रावधान जोड़ा है. इसमें कहा गया है कि निजी स्कूलों की फीस एक समिति तय करेगी. उस समिति में स्कूल प्रबंधन का एक प्रतिनिधि, प्राचार्य, चार शिक्षक व दो अभिभावक प्रतिनिधि सदस्य के रूप में होंगे. जो विचार कर फीस तय करेगी. यदि फीस 10% से अधिक बढ़ायी जाती है, तो वह मामला जिलास्तरीय समिति के पास चला जायेगा. फीस वृद्धि दो साल के लिए होगी.

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