दिल्ली में हेमंत–बाबूलाल की समान उपस्थिति और बदलते तेवरों के बीच सियासी संकेत!
गठबंधन, सलाह और संभावनाओं की नई पटकथा?
राष्ट्र संवाद संवाददाता
झारखंड की राजनीति एक दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का एक बार फिर दिल्ली दौरा, विपक्ष के कद्दावर नेता बाबूलाल मरांडी का भी उसी समय राजधानी पहुंचना, और इन दोनों के बदले हुए बयानों ने सियासी पारा गर्म कर दिया है।
जहां हेमंत सोरेन का दौरा गुरुजी (शिबू सोरेन) के स्वास्थ्य से जुड़ा बताया जा रहा है, वहीं बाबूलाल मरांडी, जो अब तक सरकार और सीएम पर सीधे निशाने साधते रहे थे, अब आलोचना की जगह सलाह देने लगे हैं। यह बदली हुई राजनीतिक भाषा झारखंड की राजनीति में कोई नया समीकरण बनने के संकेत तो नहीं?

क्या बाबूलाल का नरम रुख महज संयोग है, या केंद्र से मिली कोई रणनीतिक सलाह?
भाजपा नेतृत्व का गुरुजी से मिलना, और उसके बाद सीएम हेमंत सोरेन द्वारा भाजपा नेता कड़िया मुंडा से मुलाकात इन मुलाकातों में जितनी ‘संवेदना’ दिख रही है, उससे कहीं ज़्यादा संकेत छिपे हो सकते हैं।
सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच अचानक उभरी यह ‘सौम्यता की राजनीति’ झारखंड में राजनीतिक टकराव की बजाय अब संवाद की संभावनाएं खोल रही है या फिर यह बड़े फेरबदल से पहले की राजनीतिक शांति है यह आने वाले हफ्तों में और स्पष्ट होगा।

फिलहाल, राज्य की राजनीति में जो पक रहा है, वह सिर्फ़ झारखंड नहीं, बल्कि बिहार के चुनावी पकवान से भी जुड़ चुका है। गठबंधन की डोर मजबूत रहेगी या ढीली होगी — यह कांग्रेस, झामुमो और राजद के व्यवहार पर भी निर्भर करेगा।

बहरहाल झारखंड में राजनीतिक परिदृश्य स्थिर जरूर दिख रहा है, लेकिन गहराई में हलचल तेज है और अगला अध्याय दिल्ली की राजनीतिक रसोई में तय हो रहा है।

