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    Home » लेह, लद्दाख, गलवान… जर्रा जर्रा, कंकड़-कंकड़ में भारतीय सैनिकों के शौर्य की कहानी:पीएम नरेंद्र मोदी
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    लेह, लद्दाख, गलवान… जर्रा जर्रा, कंकड़-कंकड़ में भारतीय सैनिकों के शौर्य की कहानी:पीएम नरेंद्र मोदी

    Devanand SinghBy Devanand SinghJuly 3, 2020No Comments2 Mins Read
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    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज लद्दाख में भारतीय जवानों को संबोधित करते हुए उनका उत्साह बढ़ाया और चीन को जमकर सुनाया भी। मोदी ने साफ शब्दों में चीन को समझा दिया कि गलवान घाटी पर हमारा हक है। मोदी ने कहा कि पूरे लद्दाख में भारतीय सैनिकों के पराक्रम की निशानियां फैली हुई हैं। इस मौके पर मोदी ने चीन की विस्तारवादी नीति के लिए उसे खूब खरी-खोटी भी सुनाई। मोदी ने बताया कि केंद्र सरकार सशस्त्र बलों की जरूरतों का पूरा ध्यान रख रही है।
    अपने संबोधन में सैनिकों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी बोले, ‘लेह, लद्दाख से लेकर करगिल और सियाचिन तक, यहां की बर्फीली चोटियों से लेकर गलवान घाटी की ठंडे पानी की धारा तक। हर चोटी, हर पहाड़, हर जर्रा-जर्रा, हर कंकड़, पत्थर भारतीय सैनिकों के पराक्रम की गवाही दे रहा है।

    मोदी के बयान के कई मायने क्या
    दरअसल, गलवान घाटी विवादित क्षेत्र अक्साई चिन में है। गलवान घाटी लद्दाख और अक्साई चिन के बीच भारत-चीन सीमा के नज़दीक स्थित है। इसी इलाके में ही वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) अक्साई चिन को भारत से अलग करती है। अक्साई चिन पर भारत और चीन दोनों अपना दावा करते रहे हैं। ये घाटी चीन के दक्षिणी शिनजियांग और भारत के लद्दाख तक फैली है। दरअसल, 1962 के बाद चीन ने इस इलाके पर अवैध रूप से कब्जा किया था,

    ‘विस्तारवाद’ का युग समाप्त हो चुका है
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लद्दाख में कहा कि ‘विस्तारवाद’ का युग खत्म हो चुका है और यह युग विकासवाद का है। विस्तारवाद की नीति ने विश्व शांति के लिए खतरा पैदा किया है और इसी अनुभव के आधार पर पूरे विश्व ने इस बार फिर विस्तारवाद के खिलाफ मन बना लिया है। उन्होंने कहा, ‘विस्तार वाद का युग समाप्त हो चुका है। यह युग विकासवाद का है। तेजी से बदलते हुए समय में विकासवाद ही प्रासंगिक है। विकासवाद के लिए अवसर है और विकासवाद भविष्य का आधार भी है।’

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