श्रीमद् भागवत कथा के प्रथम दिन श्रद्धालुओं ने जाने कथा के मर्म ।
फतेहपुर
फतेहपुर प्रखंड अंतर्गत खामारवाद पंचायत के कालूपहाड़ी गाँव बजरंगवली मंदिर परिसर में चल रही 7 दिवसीय श्रीमद् भागवत महापुराण के प्रथम दिन श्रीमद् भागवत महातम्य,भक्ति नारद गोकर्ण उपाख्यान सूत शोनक, व्यास नारद संवाद, राजा परीक्षित द्वारा कलि निग्रह श्री शुकागमन कथा वृतांत का विस्तार से वर्णन किया गया। नवद्वीप (नदीया) धाम के कथावाचक श्याम सुंदर चक्रवर्ती महाराज ने पहले दिन भागवत कथा का महत्व बताते हुए कहा कि मृत्यु को जानने से मृत्यु का भय मन से मिट जाता है, जिस प्रकार परीक्षित ने भागवत कथा का श्रवण कर अभय को प्राप्त किया,
वैसे ही भागवत जीव को अभय बना देती है। श्रीमद्भागवत कथा परमात्मा का अक्षर स्वरूप है। यह परमहंसों की संहिता है, भागवत कथा हृदय को जागृत कर मुक्ति का मार्ग दिखाता है। भागवत कथा भगवान के प्रति अनुराग उत्पन्न करती है। यह ग्रंथ वेद, उपनिषद का सार रूपी फल है। यह कथा रूपी अमृत देवताओं को भी दुर्लभ है। इसी दौरान कथावाचक श्याम सुंदर चक्रवर्ती महाराज ने श्रीमद् भागवत महात्म्य के विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस कलयुग में मनुष्य अपने भावों को सत्संग के जरिए ही स्थिर रख सकता है।
सत्संग के बिना विवेक उत्पन्न नहीं हो सकता और बिना सौभाग्य के सत्संग सुलभ नहीं हो सकता। श्रीमद् भागवत कथा का 7 दिनों तक श्रवण करने से मनुष्य के सात जन्मों के पाप धुल जाते हैं, मनुष्य अपने जीवन में सातों दिवस को किसी ने किसी देवता की पूजा अर्चना करता है ,लेकिन मानव जीवन में आठवां दिवस परिवार के लिए होता है।कथावाचक द्वारा कथावाचन के दौरान कहा गया कि इस कलयुग में केवल भोलेनाथ ही शीघ्र भक्ति से प्रसन्न हो जाते हैं।
केवल 3 महीने भोलेनाथ की भक्ति करने से मनुष्य के सब कार्य सिद्ध हो जाते हैं। प्रथम दिन की कथा के समापन से पूर्व आरती की गई,आरती करने के पश्चात उपस्थित श्रद्धालुओं में प्रसाद का वितरण किया गया। तथा कथा सुनकर उपस्थित भक्त भाव विभोर हो गये और राधा कृष्ण, श्री राम के जयकारे लगने लगें।

