सेल्स प्रमोशन एम्प्लॉईज एक्ट के 50 वर्ष पूरे, मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव ने कानून बचाने का लिया संकल्प
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर:6 मार्च को मेडिकल और सेल्स रिप्रेजेंटेटिव के लिए ऐतिहासिक दिन के रूप में मनाया गया। वर्ष 1976 में राज्यसभा की कमिटी ऑन पिटिशन्स की सिफारिश के बाद लोकसभा में पारित बिल के आधार पर 6 मार्च को सेल्स प्रमोशन एम्प्लॉईज (कंडीशन्स ऑफ सर्विस) एक्ट लागू किया गया था। इस कानून के लागू होने से मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव को विशेष श्रेणी के कर्मचारी का दर्जा मिला और उनकी सेवा शर्तों को कानूनी संरक्षण प्राप्त हुआ।
अखिल भारतीय संगठन एफएमआरएआई और बिहार-झारखंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स यूनियन (बीएसएसआर यूनियन) लंबे समय से दवाइयों की कीमतों पर नियंत्रण, मुनाफाखोरी पर रोक और जीवन रक्षक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग उठाती रही है। संगठन का कहना है कि दवा नीति और दवा उद्योग से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर उन्होंने हमेशा प्रमुख भूमिका निभाई है।
संगठन के नेताओं ने कहा कि 2014 से दवाओं का मूल्य निर्धारण लागत आधारित प्रणाली के बजाय बाजार आधारित कर दिया गया, जिसके कारण हर साल दवाइयों की कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है। यूनियन इसका लगातार विरोध कर रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कॉरपोरेट दबाव में श्रम कानूनों में बदलाव कर सेल्स प्रमोशन एम्प्लॉईज एक्ट को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। लेबर कोड के जरिए स्थायी नौकरियों को फिक्स्ड टर्म रोजगार में बदलने, यूनियन बनाने के अधिकार और सामूहिक सौदेबाजी के अधिकार को सीमित करने जैसी कोशिशें की जा रही हैं।
इस अवसर पर देशभर के लाखों मेडिकल और सेल्स रिप्रेजेंटेटिव ने इस कानून की रक्षा करने का संकल्प लिया और श्रम मंत्रालय को ऑनलाइन याचिका भेजी। जमशेदपुर में भी सैकड़ों मेडिकल और सेल्स रिप्रेजेंटेटिव आम बगान मैदान में एकत्रित हुए, जहां बीएसएसआर यूनियन के राज्य अध्यक्ष डी. प्रताप और एफएमआरएआई के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सुब्रतों बिस्वास ने सभा को संबोधित किया।

