कोल इंडिया चेयरमैन ने मगध-आम्रपाली परियोजना का किया निरीक्षण, आउटसोर्सिंग के मनमानी से सीसीएल परेशान
आम्रपाली में नया कंपनी की इंट्री से उत्पादन व डिस्पैच में आई भारी गिरावट, कोल इंडिया व सीसीएल भारी परेशान
राष्ट्र संवाद संवाददाता
चतरा: सीसीएल के मगध एवं आम्रपाली कोल परियोजना में कोल इंडिया के चेयरमैन बी. साईराम ने शुक्रवार को निरीक्षण किया। इस दौरान सीसीएल के सीएमडी निलेंदु सिंह, डीटीओ चंद्रशेखर तिवारी सहित दोनों परियोजनाओं के महाप्रबंधक एवं अन्य अधिकारी मौजूद थे। इससे पहले एक दिन पूर्व सीएमडी निलेन्दु सिंह पहुंचकर पूरी वस्तुस्थिति से अवगत हो चुके थे। चेयरमैन ने सबसे पहले आम्रपाली माइंस का निरीक्षण किया। इसके बाद शिवपुरी रेलवे साइडिंग पहुंचकर कोयला डिस्पैच और परिवहन व्यवस्था का जायजा लिया। वहीं मगध माइंस तथा कोयला परिवहन के लिए इस्तेमाल होने वाली सड़कों का भी निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के बाद अधिकारियों के साथ चेयरमैन ने मैराथन बैठक की। बैठक में दोनों परियोजनाओं में कोयला उत्पादन, डिस्पैच, परिवहन व्यवस्था सहित विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। चेयरमैन ने उत्पादन और डिस्पैच में सुधार लाने तथा परियोजनाओं की कार्यक्षमता बढ़ाने को लेकर अधिकारियों को कई आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। जानकारी के अनुसार आम्रपाली में आठ वर्षों के लिए खनन और परिवहन का लगभग 10 हजार करोड़ रुपए का ठेका हासिल कर पहुंची नागार्जुन कंस्ट्रक्शन कंपनी (एनसीसी) शिवपुर साइडिंग तक कोयले की ढुलाई पेटी कान्ट्रेक्ट पर एवीएस इन्टरप्राइजेज को दी है जो निर्धारित क्षमता के अनुरूप कोयले की ढुलाई नहीं कर पा रहा है। आम्रपाली परियोजना में नई कंपनी के संचालन की जिम्मेदारी संभालने के बाद कोयला उत्पादन और डिस्पैच में भारी गिरावट आई है। उत्पादन एवं डिस्पैच में कमी को लेकर कोल इंडिया प्रबंधन की चिंता बढ़ी है और आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। इधर, पेटी कान्ट्रेक्ट में एवीएस इन्टरप्राइजेज को काम देकर एनसीसी द्वारा बैशाखी के सहारे नैया पार करने की कोशिश के कारण निर्धारित लक्ष्यों से काफी पीछे चलने का खामियाजा अब कोल मंत्रालय और सीसीएल को भारी वित्तीय नुकसान से उठाना पड़ रहा है। वहीं, मगध परियोजना में शुरुआत से ही आउटसोर्सिंग के तहत एक ही कंपनी के कार्यकाल को समय-समय पर बढ़ाए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। माना जा रहा है कि इसका असर परियोजना के कोयला उत्पादन और डिस्पैच पर पड़ रहा है। चेयरमैन के निरीक्षण और अधिकारियों के साथ हुई बैठक को इन समस्याओं के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

