बिरसानगर भूमि अतिक्रमण मामला: माइनिंग अधिकारी व वन विभाग भी हुए सतर्क, जांच समिति गठन की उठी मांग
भूमि अतिक्रमण पर अविलंब हो कार्रवाई: अरुण सिंह / चंचल लकड़ा
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर। बिरसानगर क्षेत्र में भूमि अतिक्रमण के मामले को लेकर स्थानीय नेताओं के साथ-साथ प्रशासनिक महकमा भी सतर्क हो गया है। सूत्रों के अनुसार, माइनिंग विभाग के अधिकारी और वन विभाग पूरे प्रकरण पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। उल्लेखनीय है कि पूर्व में पहाड़ तोड़े जाने की शिकायत सामने आने पर माइनिंग विभाग द्वारा कार्रवाई की गई थी। इसके बावजूद आरोप है कि भूमि माफियाओं ने वन विभाग की जमीन पर कब्जा कर उसे बेचने का प्रयास किया है।
वर्तमान में क्षेत्र में जिस तेजी से मकानों का निर्माण किया जा रहा है, उसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि इन निर्माण कार्यों का वास्तविक संरक्षक ठेकेदार है या फिर किसी राजनीतिक संरक्षण में यह गतिविधियां संचालित हो रही हैं। पूरा मामला अब गंभीर जांच का विषय बन गया है।
बताया जाता है कि इस मुद्दे को 18 दिसंबर 2024 में हिंदी दैनिक प्रभात खबर ने प्रमुखता से उठाया था, जिसके बाद प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हुई थी, लेकिन ठोस कार्रवाई न होने से अतिक्रमण की गतिविधियां जारी रहने का आरोप है।
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए हिंदू पीठ के अध्यक्ष अरुण सिंह और बिरसा सेवा दल ग्राम पंचायत के अध्यक्ष चंचल लकड़ा ने कहा कि बिरसानगर में हो रहे भूमि अतिक्रमण पर अविलंब कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने उपायुक्त से मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक विशेष जांच समिति का गठन किया जाए और अतिक्रमण के दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
नेताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अतिक्रमण का संरक्षक कोई भी हो, उससे फर्क नहीं पड़ता। प्रशासन को निष्पक्ष होकर कानून के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि सरकारी और वन भूमि को बचाया जा सके।

