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    Home » बरहरुपिये की विदाई पर कहीं है जश्न तो कहीं मातम
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    बरहरुपिये की विदाई पर कहीं है जश्न तो कहीं मातम

    Nizam KhanBy Nizam KhanAugust 18, 2025No Comments2 Mins Read
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    बरहरुपिये की विदाई पर कहीं है जश्न तो कहीं मातम
    राष्ट्र संवाद संवाददाता
    चतरा: कोयलांचल नगरी के नाम से मशहूर टंडवा में धांधली और हेरा-फेरी फर्जीवाड़ा जैसे रोज-रोज की सुर्खियां अब शायद थम जाये। पर, इन दिनों विदाई से मानों सक्रिय भू-माफियाओं के सिंडिकेट की सांसें थम जा रही है। विधिवत तौर पर विदाई के बाद भी बहुचर्चित साहब तीन पांच करके जिनके लिये जो कृपा बरसाकर गये हैं वे कम से कम उन्हें सहज हीं भुलाये नहीं भूल पा रहे हैं। ये होता है फर्ज़ जो नमक का क़र्ज़ जो मासूम हो या माफिया उसके जज्बातों को मजबूर कर देता है। बहरहाल, मातहतों ने साहब के सामने जमकर गुणगान में कसीदें पढ़े । जबकि वर्षों से जमे कुछ बाहरी बरहरुपिये जिनका मूल उद्देश्य स्थानीय भोले-भाले लोगों की अचल संपत्तियों पर नजरें गड़ी हैं वे बरबस आंखों में आंसू उतार कर साहब की विदाई पर खूब मातम मना रहे हैं। उनमें कसक कुछ हेरा-फेरी पूरी नहीं हो पाने की तमन्ना झलक रही है। दूसरी ओर, सैंकड़ों शोषितों -वंचितों के चेहरों में खुशी और सुकून का भाव इसलिए भी है कि भू-माफियाओं के सरगनाओं पर गिरे गाज से यहां शायद लंबे दिनों से सक्रिय सिंडिकेट अब आसानी से सम्हल ना पाये। आपने भी देखा होगा धांधली की जिस तरह लगातार आंधी आ रही थी उससे जांच एजेंसियों के हांथ लगे कुछ पुख्ते सबूत अब वही आंधी बनकर बिचौलियों के दहलीज़ों की ओर जाते दिखाई दे रहा है। बहरहाल, काले खनिज संपदा से अकूत काली कमाई करने वाले बहरूपिये की भी सुनने में आ रहा है उसकी भी शीघ्र विदाई है…..शायद यही वजह है वे मिलकर एक दूसरे को बस जी-भर निहारते रहे थे।

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