मेडिकल स्टोर के लाइसेंस पर चल रहा अवैध पॉलीक्लिनिक, मरीजों की जेब काटने का बड़ा खेल
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर।शहर में मेडिकल स्टोर के लाइसेंस पर अवैध पॉलीक्लिनिक चलाने का खुलासा हुआ है। साकची स्थित “मेडिसिन सेंटर” नामक दवा दुकान में एक दर्जन से अधिक डॉक्टरों की सूची डिस्प्ले कर खुलेआम इलाज किया जा रहा है। सवाल उठ रहा है कि क्या जिला स्वास्थ्य महकमा इन सब बातों से अनजान है या फिर आर्थिक लेनदेन की वजह से चुप्पी साधे हुए है?
सूत्रों के अनुसार, यहां डॉक्टरों की फीस के अलावा मरीजों से रजिस्ट्रेशन शुल्क वसूला जा रहा है, जिससे सालाना लाखों रुपये की वसूली होती है। लेकिन इस रकम का हिसाब-किताब कौन देखता है, यह बड़ा सवाल बना हुआ है।
नियमों की अनदेखी
दवा दुकान खोलने के लिए ड्रग विभाग फार्मासिस्ट की डिग्री पर लाइसेंस जारी करता है। नियम के मुताबिक उस दुकान में फार्मासिस्ट का बैठना अनिवार्य होता है। वहीं किसी मेडिकल स्टोर को अगर डॉक्टर बैठाकर इलाज कराना है तो उसे क्लिनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट के तहत पॉलीक्लिनिक का अलग से लाइसेंस लेना अनिवार्य है।
परंतु कई बड़े मेडिकल स्टोर इस नियम को दरकिनार कर अवैध पॉलीक्लिनिक चला रहे हैं, जो कि संगठित अपराध की श्रेणी में आता है।
मरीजों का आर्थिक शोषण
जानकारों का कहना है कि मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव डॉक्टरों से अपनी कंपनी की दवा लिखवाने के लिए सेल्स टारगेट तय करते हैं। लालच में आकर डॉक्टर मरीजों को वही दवाइयां लिखते हैं, जो जरूरी न होते हुए भी महंगी और गैर-जरूरी होती हैं।
इससे मरीज को सही दवा समय पर नहीं मिलती और बीमारी लंबी खिंच जाती है। मरीज को दोबारा डॉक्टर के पास जाना पड़ता है, जहां दवा बदलकर पहली प्राथमिकता वाली दवाएं दी जाती हैं। इससे मरीज का आर्थिक, मानसिक और शारीरिक शोषण होता है।
जिम्मेदारी से बचता स्वास्थ्य विभाग?
मामले पर अब सवाल उठ रहे हैं कि जिले का स्वास्थ्य विभाग इस पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा है। जानकारों का कहना है कि अगर स्वास्थ्य मंत्री, स्वास्थ्य सचिव, राज्य फार्मेसी परिषद और जिले के सिविल सर्जन संवेदनशीलता दिखाएं तो इस अवैध खेल पर रोक लगाई जा सकती है।

