भ्रष्टाचार की पोल खोलती एक तस्वीर — उत्क्रमित मध्य विद्यालय, बेड़ा!
निजाम खान। राष्ट्र संवाद
जामताड़ा: कुंडहित प्रखंड अंतर्गत बेड़ा स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय के भवन की वर्तमान स्थिति देखकर कोई भी यह कह सकता है कि यहाँ सरकारी राशि का सही उपयोग नहीं हुआ। विद्यालय का रंग-रोगन फीका, दीवारों पर पपड़ी और गंदगी इस बात का प्रमाण हैं कि विकास के नाम पर मिलने वाला पैसा अपने वास्तविक उद्देश्य तक नहीं पहुँच पाया।
विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक गंगाधर सिंह से जब इस बाबत पूछा गया, तो उन्होंने मौखिक रूप से बताया कि विद्यालय में कुल 40 बच्चे नामांकित हैं। उन्होंने यह भी कहा कि 25 हजार रुपये का सरकारी फंड आया था, जिसमें से 10 हजार रुपये रंग-रोगन पर और 15 हजार रुपये अन्य कार्यों पर खर्च किए गए। लेकिन विद्यालय की हालत यह बताने के लिए काफी थी जैसे प्रतित हो रहा है कि विद्यालय का रंग-रोगन हुआ ही नही कहने से इंकार नही किया जा सकता है। वही विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक ने मौखिक रूप से कहा की जून में विद्यालय का रंग-रंग-रोगन हुआ था लेकिन विद्यालय का हालत देखकर कोई भी कह देगा कि इस विद्यालय का रंग-रोगन हुआ ही नहीं। अगर हुआ भी है तो दो- ढाई महीने के अंदर विद्यालय का स्थिति ऐसा क्यों?
पत्रकार निज़ाम खान ने जब उनसे नाम पूछना चाहा, तो पहले उन्होंने टाल-मटोल की। बाद में विद्यालय में लगे नाम-पट्ट से ही पता चला कि प्रभारी गंगाधर सिंह हैं। इस तरह की हिचक और अस्पष्ट जवाब स्वाभाविक रूप से संदेह पैदा करते हैं।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि सरकारी फंड, जो बच्चों की पढ़ाई और स्कूल के विकास के लिए आता है, उसका उपयोग पारदर्शी तरीके से नहीं हो रहा। अगर 25,000 रुपये का सही उपयोग हुआ होता, तो विद्यालय की दीवारें, कक्षाएँ और परिसर साफ-सुथरे और रंगीन दिखाई देते।
भ्रष्टाचार केवल पैसों की हेराफेरी तक सीमित नहीं है, यह बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ भी है। जब स्कूल का माहौल जर्जर और अव्यवस्थित होगा, तो बच्चे पढ़ाई के प्रति प्रेरित नहीं होंगे। यही कारण है कि विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति भी बेहद कम देखी गई।
ऐसे मामलों में सिर्फ संदेह व्यक्त करना काफी नहीं, बल्कि संबंधित विभाग को जांच कर ठोस कार्रवाई करनी चाहिए। प्रत्येक रुपये का हिसाब, खर्च के प्रमाण और कार्य की गुणवत्ता की जाँच होनी चाहिए। यदि गड़बड़ी पाई जाए, तो जिम्मेदार पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
पारदर्शिता, जिम्मेदारी और ईमानदारी ही ऐसे मामलों का समाधान है—और यह तभी संभव है जब समाज, मीडिया और प्रशासन मिलकर भ्रष्टाचार के खिलाफ एकजुट होकर कदम उठाएँ।

