नेमरा पहुंचे झारखंड विधानसभाध्यक्ष, दिशोम गुरु शिबू सोरेन को दी श्रद्धांजलि
निजाम खान। राष्ट्र संवाद
रांची: झारखंड के राजनीतिक और सामाजिक जीवन में एक महत्वपूर्ण अध्याय का समापन तब हुआ जब दिशोम गुरु शिबू सोरेन का निधन हुआ। उनके निधन से राज्यभर में शोक की लहर दौड़ गई। शुक्रवार को झारखंड विधानसभाध्यक्ष रबीन्द्रनाथ महतो शिबू सोरेन के पैतृक गांव नेमरा पहुंचे और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने दिवंगत नेता के प्रति अपनी गहरी संवेदना प्रकट करते हुए परिवारजनों से मुलाकात की और उन्हें ढांढस बंधाया।
रबीन्द्रनाथ महतो ने नेहरा गांव में शिबू सोरेन के फोटो पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि दिशोम गुरु न केवल एक जननेता थे, बल्कि वे आदिवासी समाज के गौरव और झारखंड आंदोलन के पुरोधा भी थे। उनका जीवन संघर्ष और सेवा का प्रतीक रहा है। विधानसभाध्यक्ष ने कहा कि शिबू सोरेन का जीवन सभी जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। वे अपने विचारों और सिद्धांतों के लिए हमेशा अडिग रहे।
विधानसभाध्यक्ष ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, शिबू सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन और अन्य परिजनों से भेंट कर अपनी संवेदना प्रकट की। उन्होंने परिवार के प्रति सहानुभूति जताते हुए कहा कि दुख की इस घड़ी में वे अकेले नहीं हैं, पूरा झारखंड उनके साथ खड़ा है। उन्होंने परिजनों को भरोसा दिलाया कि विधानसभा के सभी सदस्य हमेशा उनके साथ खड़ी रहेगी।
दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने झारखंड को अलग राज्य का दर्जा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनका राजनीतिक सफर संघर्षों से भरा रहा, लेकिन उन्होंने कभी भी अपने आदर्शों से समझौता नहीं किया। वे झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक नेताओं में से एक थे और देश के कोयला मंत्री भी रहे। झारखंड की राजनीति में उन्हें ‘धरतीपुत्र’ के रूप में सम्मानित किया जाता है।
रबीन्द्रनाथ महतो ने कहा कि शिबू सोरेन की अनुपस्थिति में झारखंड ने एक युगपुरुष को खो दिया है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है। उनके विचार और उनके द्वारा किए गए कार्यों को आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे दिशोम गुरु के जीवन से प्रेरणा लेकर समाज और राज्य की सेवा में आगे आएं।
नेमरा गांव सहित पूरे झारखंड में शोक की लहर है और माहौल बेहद भावुक है। लोग आंखों में आंसू लिए उनके योगदान को याद कर रहे है। झारखंड में कई स्थानों पर शोकसभाएं आयोजित की जा रही हैं।
झारखंड की राजनीति में दिशोम गुरु का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। उनका व्यक्तित्व, संघर्ष और सेवा भाव राज्य के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगा।

