बिक्रमपुर व पांचकुड़ी में मुहर्रम के अवसर पर अखाड़ा में नहीं पहुंच पाए आदर्श विधानसभाध्यक्ष, फिर भी निभाई सामाजिक जिम्मेदारी,किया खेद प्रकट
निजाम खान। राष्ट्र संवाद
जामताड़ा: नाला विधानसभा क्षेत्र के बिक्रमपुर तथा पांचकुड़ी गांव में मुहर्रम के अवसर पर आयोजित अखाड़ा कार्यक्रम में इस बार विशेष तैयारी की गई थी। आयोजन को लेकर गांव में उत्साह चरम पर था। हर वर्ग के लोगों ने मिल-जुलकर इस धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा को सजाने-संवारने में भागीदारी निभाई। परंतु इस बार राज्य के विधानसभाध्यक्ष रबीन्द्रनाथ महतो भारी व्यस्तता के चलते कार्यक्रम में शरीक नहीं हो सके। हालांकि उनका वहाँ शारीरिक रूप से उपस्थित न रहना उनके सामाजिक उत्तरदायित्व से विमुखता का संकेत नहीं, बल्कि एक सकारात्मक नेतृत्व शैली का उदाहरण बना।
गैर-मौजूदगी में भी संदेश के जरिए जुड़ाव
रबीन्द्रनाथ महतो ने अपनी अनुपस्थिति के बावजूद नाला विधानसभा के बिक्रमपुर और पांचकुड़ी गांव की सभी अखाड़ा टीमों को धन्यवाद ज्ञापित किया और उन्हें शुभकामनाएं भेजीं। यह साधारण औपचारिकता नहीं थी, बल्कि यह दिखाता है कि वे अपनी व्यस्तताओं के बावजूद क्षेत्र की संस्कृति और परंपराओं से भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं। उनका यह कदम स्थानीय लोगों को यह संदेश देता है कि नेतृत्व केवल मंच पर उपस्थिति से नहीं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव और निरंतर संवाद से भी निभाया जा सकता है।
सांस्कृतिक एकता और सामुदायिक सहभागिता का उत्सव
मुहर्रम का आयोजन केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नहीं होता, बल्कि यह सामाजिक समरसता, अनुशासन और वीरता के प्रतीक के रूप में भी मनाया जाता है। इस अवसर पर बिक्रमपुर और पांचकुड़ी में युवाओं ने पारंपरिक ढंग से अखाड़ा प्रदर्शन किया, जिसमें तालमेल, अनुशासन और शारीरिक कौशल की अद्भुत झलक देखने को मिली। इन कार्यक्रमों में हिंदू-मुस्लिम सभी समुदाय के लोगों की सहभागिता यह दर्शाती है कि विविधता में एकता की मिसाल आज भी हमारे गांवों में ज़िंदा है।
जनप्रतिनिधि का भावनात्मक जुड़ाव
रबीन्द्रनाथ महतो की अनुपस्थिति के बावजूद क्षेत्रवासियों ने उनके भेजे गए शुभकामनाओं को खुले दिल से स्वीकारा। जब उनका संदेश गांव तक पहुंचा, तो लोगों ने इसे सम्मान के रूप में लिया। यह उनके नेतृत्व की प्रभावशीलता का प्रमाण है, जहाँ एक जनप्रतिनिधि के प्रति जनता का भरोसा इतना दृढ़ है कि केवल संदेश से भी उन्हें आत्मीयता महसूस होती है।
भविष्य के लिए प्रेरणा
यह घटना उन जनप्रतिनिधियों के लिए भी एक प्रेरणा है, जो सोचते हैं कि केवल उपस्थिति ही कर्तव्य की पूर्ति है। रबीन्द्रनाथ महतो ने यह सिद्ध किया कि संवाद, संवेदनशीलता और निरंतर संपर्क भी उतने ही प्रभावी उपकरण हैं जनसेवा में। जब एक नेता अपने लोगों की संस्कृति और उत्सवों का सम्मान करता है, तो वह समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
बिक्रमपुर और पांचकुड़ी के मुहर्रम अखाड़ा में रबीन्द्रनाथ महतो की शारीरिक अनुपस्थिति के बावजूद उनका संदेश और शुभकामनाएं वहाँ की जनता के दिलों तक पहुँची। यह दिखाता है कि सच्चा नेतृत्व मंच पर भाषण देने से नहीं, बल्कि लोगों की भावनाओं को समझने और उन्हें सम्मान देने से आता है। यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि जब एक नेता और जनता के बीच विश्वास का पुल मजबूत होता है, तो हर पर्व और उत्सव एक सामाजिक एकता का पर्व बन जाता है।
मुहर्रम जैसे आयोजन केवल धार्मिक भावनाओं का प्रतीक नहीं, बल्कि हमारी सामाजिक साझेदारी, विविधता और समरसता का प्रतिबिंब भी हैं—जिसे विधानसभाध्यक्ष रबीन्द्रनाथ महतो ने अपनी सोच और व्यवहार से मजबूती दी है।
विधानसभाध्यक्ष रबीन्द्रनाथ महतो ने क्या कहा:भारी व्यस्तता के कारण इस वर्ष मैं मुहर्रम के पावन अवसर पर नाला विधानसभा क्षेत्र के बिक्रमपुर एवं पांचकुड़ी गांवों में आयोजित परंपरागत अखाड़ा कार्यक्रम में शरीक नहीं हो सका, इसका मुझे खेद है।
हालांकि भौतिक रूप से उपस्थित न रह पाने के बावजूद, मेरा मन और मेरी शुभकामनाएं आप सभी के साथ थीं। आपने जिस अनुशासन, उत्साह और परंपरा के साथ अखाड़ा का आयोजन किया, वह न केवल क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को संजोने का कार्य है, बल्कि युवाओं में आत्मबल, एकता और भाईचारे का भी संदेश देता है।
मैं सभी अखाड़ा टीमों, आयोजकों, ग्रामवासियों और सहयोगियों को इस सफल आयोजन के लिए हृदय से धन्यवाद देता हूं। आप सभी ने न केवल परंपरा को जीवित रखा बल्कि समाज में सौहार्द और सांस्कृतिक एकता का भी अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया।
आप सभी का यह जोश, अनुशासन और समर्पण भविष्य में भी ऐसे आयोजनों को और गौरवशाली बनाएगा। मेरा विश्वास है कि आने वाले वर्षों में भी यह परंपरा और सशक्त होगी, और मैं स्वयं आप सबके बीच रहकर इस गौरव को साझा कर सकूंगा।
आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं एवं ढेर सारा स्नेह।
– रबीन्द्रनाथ महतो
आदर्श विधानसभाध्यक्ष, झारखंड विधानसभा

