Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » जामताड़ा के कुंडहित कांड के बाद अब झारखंड ही नही पूरे देश में बालिका विद्यालयों की सुरक्षा—नियुक्ति प्रणाली में बदलाव की ज़रूरत
    Breaking News जामताड़ा झारखंड

    जामताड़ा के कुंडहित कांड के बाद अब झारखंड ही नही पूरे देश में बालिका विद्यालयों की सुरक्षा—नियुक्ति प्रणाली में बदलाव की ज़रूरत

    Nizam KhanBy Nizam KhanJune 30, 2025No Comments6 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    जामताड़ा के कुंडहित कांड के बाद अब झारखंड ही नही पूरे देश में बालिका विद्यालयों की सुरक्षा—नियुक्ति प्रणाली में बदलाव की ज़रूरत

    निजाम खान।राष्ट्र संवाद

    बीते रविवार को ही झारखंड के जामताड़ा जिले के कुंडहित स्थित अनुसूचित जनजाति आवासीय बालिका विद्यालय में घटित शर्मनाक घटना ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। विद्यालय की एक छात्रा द्वारा विद्यालय के प्राचार्य बिनोद खावड़े पर दुष्कर्म का गंभीर आरोप लगाया जाना केवल एक अपराध नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र और बालिका सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान है।जहाँ एक ओर सरकार आदिवासी इलाकों में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए आवासीय विद्यालयों की स्थापना कर रही है, वहीं दूसरी ओर ऐसी घटनाएँ उस विश्वास को तोड़ रही हैं, जो अभिभावक और छात्राएं इन विद्यालयों से रखते हैं। यह घटना केवल एक छात्रा के साथ अन्याय नहीं, बल्कि एक पूरे समुदाय के भरोसे की हत्या है।

    शिक्षा के मंदिर में भय का अब माहौल होने लगा:विद्यालय, खासकर आवासीय बालिका विद्यालय, केवल शैक्षणिक संस्थान नहीं होते; वे उन बच्चियों के लिए सुरक्षित आवास होते हैं जो समाज के हाशिये से उठकर आगे बढ़ने का सपना देखती हैं। वहाँ पर कार्यरत हर व्यक्ति, विशेषकर प्राचार्य जैसे पद पर बैठा हुआ अधिकारी, उन बच्चियों के लिए संरक्षक की भूमिका निभाता है। जब यही संरक्षक शोषक बन जाए, तो ऐसी संस्थाओं का उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है।

    जामताड़ा के कुंडहित कांड में बच्चियों और उनके अभिभावकों का आक्रोश पूरी तरह जायज़ है। सड़क जाम, बच्चों को वापस घर ले जाना और स्कूल प्रशासन पर अविश्वास इस बात का संकेत है कि अब समय आ गया है जब झारखंड सरकार और शिक्षा विभाग को बालिका विद्यालयों की नीतियों और प्रबंधन पर पुनः विचार करना होगा।

    झारखंड ही नही पूरे देश के सभी बालिका विद्यालयों में महिला शिक्षकों की अनिवार्यता:घटना के बाद उठी यह माँग कि बालिका आवासीय विद्यालयों में केवल महिला शिक्षकों की नियुक्ति हो, एकदम तार्किक है। जब छात्राएं दिन-रात स्कूल परिसर में रहती हैं, तो उन्हें एक ऐसा वातावरण चाहिए जहाँ वे पूरी तरह सुरक्षित महसूस कर सकें। बालिका विद्यालयों में महिला शिक्षकों की उपस्थिति न केवल सुरक्षा बढ़ाती है, बल्कि छात्राओं को मानसिक रूप से भी अधिक सहज महसूस कराती है।

    महिला शिक्षकों की नियुक्ति से छात्राओं को रोल मॉडल भी मिलते हैं, जो उन्हें शिक्षा, आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान की ओर प्रेरित करते हैं। यह बदलाव केवल सुरक्षा की दृष्टि से ही नहीं, बल्कि छात्राओं के सर्वांगीण विकास के लिए भी आवश्यक है।

    नाइट गार्ड के लिए विद्यालय परिसर से बाहर में हो व्यवस्था: वही विद्यालय की बच्चियों को सुरक्षा प्रदान के लिए नाइट गार्ड की व्यवस्था होनी चाहिए जिसका व्यवस्था विद्यालय के बाहर होना चाहिए उनके लिए एक कमरा भी विद्यालय परिसर से बाहर होना चाहिए।

    प्रशासन की देखी गई सकारात्मक पहल: जामताड़ा जिला के प्रभारी जिला कल्याण पदाधिकारी ओबीसर मुर्मू ने कहा अभिभावकों द्वारा अपनी-अपनी बच्चियों को घर ले जाया जा रहा हैं फिलहाल लिखित आवेदन के आधार पर ।जल्द ही स्कूल में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं व्यवस्थित हो जाएगी ।अभिभावकों का डिमांड है कि विद्यालय में सभी महिला शिक्षिका ही नियुक्त हो, रसोईया से लेकर गार्ड तक विद्यालय परिसर में महिला ही रहे।पुरुष नाइट गार्ड के लिए विद्यालय परिसर से बाहर व्यवस्था हो।कहा इन सभी मांगों को सुनने के लिए विभाग तत्पर है। वही मौके पर नाला अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी मनोज कुमार महतो ने कहा अपराधी जल्द ही सलाखों के पीछे होगा ।मौके पर जब अभिभावकगण लिखित आवेदन के आधार पर अपनी अपनी बच्चियों को घर ले जा रहे थे तभी मौके पर प्रभारी जिला कल्याण पदाधिकारी ओबीसार मुर्मू ,नाला अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी मनोज कुमार महतो के अलावा कुंडहित प्रखंड विकास पदाधिकारी मोहम्मद जमाले राजा ,कुंडहित अंचलाधिकारी सीताराम महतो, कुंडहित थाना प्रभारी प्रदीप कुमार मौजूद थे।

    सरकारी जवाबदेही और नीति सुधार:इस घटना के बाद केवल आरोपी को गिरफ़्तार करना पर्याप्त नहीं है। यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में ऐसी घटनाएँ दोहराई न जाएँ। इसके लिए राज्य सरकार को कई कदम तत्काल उठाने चाहिए।जिसमें से मुख्य रूप से सभी बालिका आवासीय विद्यालयों का ऑडिट: प्रशासनिक व्यवस्था, स्टाफ की नियुक्ति प्रक्रिया, सुरक्षा मानकों और छात्राओं से नियमित संवाद की प्रणाली की समीक्षा हो।सीसीटीवी और निगरानी प्रणाली: हर स्कूल परिसर में निगरानी कैमरे और शिकायत प्रणाली होनी चाहिए, जिससे छात्राएं किसी भी प्रकार की असहज स्थिति की रिपोर्ट सीधे उच्च अधिकारियों तक कर सकें। महिला अधीक्षक और टीचर्स की प्राथमिकता: बालिका विद्यालयों में पुरुष कर्मचारियों की नियुक्ति को बंद किया जाए और प्रशासनिक पदों पर केवल महिला कर्मियों की नियुक्ति की नीति बनाई जाए। प्रशिक्षण और मानसिक जांच: स्कूल प्रशासन से जुड़े सभी कर्मियों का मनोवैज्ञानिक परीक्षण किया जाए और उन्हें बच्चों के साथ व्यवहार के लिए संवेदनशीलता का प्रशिक्षण दिया जाए।सख्त कानूनी कार्यवाही और पारदर्शिता: इस मामले में दोषी पाए जाने पर आरोपी को कठोर सजा दी जाए और कानूनी प्रक्रिया को सार्वजनिक रूप से पारदर्शी रखा जाए, ताकि पीड़िता और समाज को न्याय का भरोसा हो।

    सामाजिक भूमिका और अभिभावकों की भागीदारी:सिर्फ सरकार या विद्यालय प्रशासन की ज़िम्मेदारी नहीं है; समाज और अभिभावकों को भी सजग रहना होगा। बच्चों को नियमित रूप से उनकी स्थिति पूछना, मानसिक और भावनात्मक स्थिति पर ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है। कई बार डर, शर्म या सामाजिक कलंक के भय से बच्चियाँ कुछ कह नहीं पातीं, और ऐसे अपराधियों का दुस्साहस बढ़ता जाता है।

    अभिभावकों की यह माँग कि विद्यालयों में पुरुष शिक्षकों की नियुक्ति न हो, एक अस्थायी समाधान हो सकता है, लेकिन दीर्घकालिक समाधान एक सशक्त और संवेदनशील निगरानी तंत्र ही हो सकता है जो किसी भी लिंग, जाति या वर्ग के व्यक्ति को नियमों के तहत जवाबदेह बनाता है।जामताड़ा की यह घटना एक चेतावनी है कि बालिका विद्यालयों में सिर्फ शिक्षा नहीं, सुरक्षा, विश्वास और गरिमा का माहौल भी अनिवार्य है। अगर हम चाहते हैं कि हमारी बेटियाँ आत्मविश्वास से आगे बढ़ें, तो हमें उन्हें एक ऐसा परिवेश देना होगा जो पूरी तरह सुरक्षित और सहायक हो।

    झारखंड सरकार और शिक्षा विभाग के लिए यह समय आत्ममंथन का है। यह केवल एक स्कूल की नहीं, बल्कि पूरे राज्य की बच्चियों की सुरक्षा और भविष्य का सवाल है। यह घटना अगर एक व्यापक नीति सुधार की शुरुआत बनती है, तो शायद उस बच्ची का साहस व्यर्थ नहीं जाएगा।

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleपबिया में खतरनाक फिसली बाइक, दो युवक गंभीर रूप से घायल
    Next Article सांसद विद्युत वरण महतो ने हूल दिवस पर महान योद्धा सिद्धो – कान्हू के प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया नमन

    Related Posts

    पटमदा में अवैध शराब के खिलाफ उत्पाद विभाग की बड़ी कार्रवाई, 30 लीटर चुलाई शराब जब्त

    June 3, 2026

    चांदी साफ करने के बहाने महिलाओं को बनाते थे निशाना, छह सदस्यीय ठग गिरोह गिरफ्तार

    June 3, 2026

    वार्ड पार्षद नीतू शर्मा की मुहिम रंग लाई: प्रभात पार्क में नशाखोरी, उगाही और अराजकता पर कार्रवाई के संकेत

    June 3, 2026

    Comments are closed.

    अभी-अभी

    पटमदा में अवैध शराब के खिलाफ उत्पाद विभाग की बड़ी कार्रवाई, 30 लीटर चुलाई शराब जब्त

    चांदी साफ करने के बहाने महिलाओं को बनाते थे निशाना, छह सदस्यीय ठग गिरोह गिरफ्तार

    वार्ड पार्षद नीतू शर्मा की मुहिम रंग लाई: प्रभात पार्क में नशाखोरी, उगाही और अराजकता पर कार्रवाई के संकेत

    सीमांकन के बिना बालू उठाव नहीं, ग्राम सभा ने जताया विरोध मशीन से खनन पर रोक और स्थानीय लोगों को रोजगार देने की मांग

    नीमडीह नव पदस्थापित थाना प्रभारी का संगठन ने द्वारा स्वागत

    अत्याधुनिक सुविधायुक्त बनेगा कांड्रा स्टेशन, डीआरएम तरुण होरिया ने कांड्रा स्टेशन का दौरा कर चल रहे विकास कार्यों का लिया जायजा

    आनंदमार्ग यूनिवर्सल रिलीफ टीम में 500 लोगो के बीच किया पौधा वितरण

    भाटिन माइंस में सुरक्षा चूक पर यूसील की बड़ी कार्रवाई, अधिकारी हटाए गए, सुरक्षा व्यवस्था और सख्त

    हरिणा मेला की बंदोबस्ती बहाल करने की मांग, मुखिया देवी कुमारी भूमिज ने उपायुक्त को लिखा पत्र

    सफाई कर्मियों के अधिकारों को लेकर यूथ इंटक का प्रदर्शन, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा मांगपत्र

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.