शेफर्ड इंग्लिश स्कूल में नियमों की अनदेखी, बिना रजिस्ट्रेशन, बिना इंश्योरेंस ,बिना फिटनेस सर्टिफिकेट की दौर रही है वाहन
देश के कर्णधारों की जान खतरे में
शिक्षा अधिकारी, उपायुक्त, डीटीओ, यूसीआईएल सीएमडी और जिला प्रशासन को लिखित शिकायत
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जादूगोड़ा। शेफर्ड इंग्लिश स्कूल में नियमों की अनदेखी कर संचालन किया जा रहा है। स्कूल की गाड़ियां बिना रजिस्ट्रेशन, बिना इंश्योरेंस और बिना फिटनेस सर्टिफिकेट के चल रही हैं। इससे बच्चों की जान खतरे में है। स्कूल अधिनियम के तहत भी इसका संचालन नहीं हो रहा है।
इसको लेकर जादूगोड़ा के ग्रामीणों ने भाजपा नेता और जिला महामंत्री रोहित सिंह से शिकायत की। रोहित सिंह ने बताया कि परिजनों की समस्याएं सुनने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी, उपायुक्त, डीटीओ, यूसीआईएल सीएमडी और जिला प्रशासन को लिखित शिकायत दी गई है।
स्कूल की गाड़ियां यूसीआईएल कॉलोनी गेट से होकर धर्मडीह तक जाती हैं। इस रास्ते से हजारों लोग यूसीआईएल माइंस और परमाणु ऊर्जा केंद्रीय विद्यालय आते-जाते हैं। अगर कोई दुर्घटना होती है तो यूसीआईएल प्रबंधन को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। लोग मुआवजे और नौकरी की मांग करेंगे।
यूसीआईएल कॉलोनी में बाहरी गाड़ियों को नियमित रूप से आने की अनुमति नहीं है। इसके बावजूद स्कूल वाहन बेरोकटोक कॉलोनी में आ-जा रहे हैं। यूसीआईएल के जीएम राकेश कुमार ने बताया कि इस मामले में कार्रवाई की जा रही है। स्कूल प्रबंधन को गाड़ियां कॉलोनी में खड़ी न करने का निर्देश दिया गया है।
स्कूल बिना अनुमति के यूसीआईएल की जमीन पर कार्यक्रम आयोजित करता है। वार्षिक उत्सव के नाम पर परिजनों से लाखों रुपए वसूले जाते हैं। इस पर यूसीआईएल प्रबंधन ने नाराजगी जताई है।
स्कूल में न तो प्लेग्राउंड है, न ही कोई उचित रास्ता। अगर कोई हादसा हो जाए तो फायर ब्रिगेड या एंबुलेंस भी स्कूल तक नहीं पहुंच सकती।
स्कूल को सिर्फ आठवीं तक पढ़ाने की अनुमति है, लेकिन यहां दसवीं तक की पढ़ाई कराई जा रही है। स्कूल सीबीएसई बोर्ड के नाम से चलता है, लेकिन बच्चों का बोर्ड एग्जाम झारखंड बोर्ड से दिलवाया जाता है। रजिस्ट्रेशन भी दूसरे स्कूल से कराया जाता है। परिजनों को कहा जाता है कि बच्चा कमजोर है, इसलिए झारखंड बोर्ड से परीक्षा दिलानी होगी। इसके लिए अतिरिक्त पैसे वसूले जाते हैं।
स्कूल वाहन में बच्चों को ओवरलोड बैठाया जाता है। गाड़ियां स्कूल वाहन के नियमों के अनुरूप नहीं हैं। इसकी जांच डीटीओ से कराने की मांग की गई है।
बच्चों को स्कूल से ही किताब, कॉपी और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है। यह नियमों के खिलाफ है।
शिक्षकों को समय पर वेतन नहीं दिया जाता। महीनों इंतजार के बाद दो-तीन महीने में कुछ पैसे दिए जाते हैं। पूरे मामले की जांच कर स्कूल को बंद कराने की मांग की गई है। साथ ही क्षेत्र के अन्य स्कूलों की भी जांच की मांग की गई है।
वहीं वाहन चालकों को भी काफी कम वेतन दिया जाता है।
स्कूल में लाइन जाने के बाद जनरेटर की व्यवस्था नहीं है जिससे बच्चों को गर्मी में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है कई बार परिजनों के द्वारा शिकायत करने के बावजूद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।।
गाड़ी की जर्जर अवस्था के कारण कई बार छात्र गाड़ी से गिर भी चुके हैं और इसकी शिकायत स्कूल प्रबंधन से की गई कई बार अभिभावकों ने भारी आक्रोश भी जाते लेकिन स्कूल में जर्जर गाड़ी का ही परिचालन जारी है
