Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » बच्चों के बचपन को बचाए रखने के लिए बाल नाटक काफी प्रभावशाली हो सकती है:कीर्ति जैन
    Breaking News चाईबासा जमशेदपुर झारखंड

    बच्चों के बचपन को बचाए रखने के लिए बाल नाटक काफी प्रभावशाली हो सकती है:कीर्ति जैन

    Nizam KhanBy Nizam KhanJune 8, 2025No Comments2 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    बच्चों के बचपन को बचाए रखने के लिए बाल नाटक काफी प्रभावशाली हो सकती है:कीर्ति जैन

    राष्ट्र संवाद संवाददाता

    जमशेदपुर : “समाज बच्चों के ऊपर जिस तरह का दबाव डाल रहा है, उनका बचपन अब पहले जैसा नहीं रहा, बच्चों के बचपन को बचाए रखने के लिए बाल नाटक काफी प्रभावशाली हो सकती है।” उपरोक्त बातें दिल्ली से आई रेखा जैन की छोटी पुत्री व नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा की भूतपूर्व निदेशक कीर्ति जैन ने भारतीय जननाट्य संघ ( इप्टा ) के द्वारा रेखा जैन जन्मशती समारोह पर सेंटर फॉर एक्सीलेंस सभागार में आयोजित “रेखा जैन का नियमित रंगकर्म और आज का बाल रंग कर्म” विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान कही। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि रेखा जैन की जीवन की यात्रा काफी रोमांचक थी, वह काफी रूढ़िवादी परिवार से थी, आजादी के संघर्ष के दिनों में किसी भी महिला का सांस्कृतिक दल में शामिल होना बड़ी बात थी। उनका पहला हिंदी नाटक बंगाल के अकाल पर आधारित था, हिंदी रंगमंच में रेखा जैन जी का भी अहम योगदान है। हिंदी बोले जाने वाले राज्यों में से एक झारखंड के जमशेदपुर में रेखा जैन के योगदान को याद किया जाना हमारे परिवार के लिए काफी भावनात्मक है। मुंबई से जमशेदपुर पहुंची इप्टा की राष्ट्रीय सचिव उषा आर्टले ने रेखा जैन की आत्मकथा “याद घर” के बारे में चर्चा करते हुए बताया कि रेखा की के सम्पूर्ण जीवन से काफी कुछ सीखा जा सकता है। जीवनी को पढ़कर भारत में और विदेशों के बाल रंगमंच को जानना भी रोचक होगा। बच्चों के साथ काम करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को जीवनी जरूर पढ़नी चाहिए, यह व्यक्तित्व को बदल देने वाला होगा। लखनऊ से आई सुमन श्रीवास्तव और पटना से आए तनवीर जी व अन्य ने भी सभा को संबोधित किया।

    कार्यक्रम के सफल आयोजन में प्रशिक्षक क्षितिज, संतोष, इप्टा की झारखंड महासचिव अर्पिता, गोमहेड के रामचंद्र मार्डी, उर्मिला, प्रदीप सोलोमन व जमशेदपुर इप्टा से जुड़े साथियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। वही मौके पर साहित्यिक व रंगकर्म के कई गणमान्य अतिथि प्रमुख रूप से मौजूद थे। कार्यक्रम के दौरान मंच संचालन अहमद बद्र जी ने किया, वही बाल कलाकार वर्षा ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleहल्दीपोखर में शिव गाजन पूजा और छऊ नृत्य का भव्य आयोजन
    Next Article दो माह के 40 किलो आवंटन में दुकानदार 8 किलो कटौती कर रहा है

    Related Posts

    जमशेदपुर पुलिस की बड़ी कार्रवाई: टेल्को फायरिंग कांड के दो आरोपी हथियार के साथ गिरफ्तार

    May 10, 2026

    बर्मामाइंस पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 175 पुड़िया ब्राउन शुगर के साथ 5 तस्कर गिरफ्तार, अंतरजिला नेटवर्क ध्वस्त

    May 10, 2026

    स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए ‘लिबर्टी ब्लॉक’ एप लॉन्च

    May 10, 2026

    Comments are closed.

    अभी-अभी

    जमशेदपुर पुलिस की बड़ी कार्रवाई: टेल्को फायरिंग कांड के दो आरोपी हथियार के साथ गिरफ्तार

    बर्मामाइंस पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 175 पुड़िया ब्राउन शुगर के साथ 5 तस्कर गिरफ्तार, अंतरजिला नेटवर्क ध्वस्त

    स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए ‘लिबर्टी ब्लॉक’ एप लॉन्च

    विविध क्षेत्रीय कलारूपों को व्यापक दर्शकों के सामने प्रस्तुत करने का मौकाःमोनिका

    “मां सिर्फ रिश्ता नहीं, जीवन की आधारशिला” — आदित्यपुर में तेजश्विनी संगठन ने मनाया भावनात्मक मातृ दिवस समारोह

    बड़ा फैसलाःरेल जीएम से मिलेगा रेल यात्री संघर्ष समिति का प्रतिनिधिमंडल

    सांझा साहित्य मंच की काव्य गोष्ठी में बिखरे भावों के विविध रंग, कवियों ने माँ को किया नमन

    बंगाल की हिंसा लोकतंत्र पर धब्बा और बड़ी चुनौती | राष्ट्र संवाद

    दिल्ली में असम की बेटी मनीषा शर्मा को राष्ट्रीय पुरस्कार: मूगा वेशभूषा में चमकीं लेखिका

    अनाज के ढेर पर भूखी दुनिया: वैश्विक भुखमरी का संकट | राष्ट्र संवाद

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.