राष्ट्र संवाद न्यूज़, मो0 असद की रिपोर्ट/नरायणपुर/जामताड़ा:
देश में अमन, चैन और खुशहाली की दुआ के साथ इज्तिमा का हुआ समापन
जामताड़ा : नारायणपुर प्रखंड के बांकुडीह में चल रहे तीन दिवसीय सलाना इज्तिमा का समापन सोमवार की सुबह 10 बजे देश में अमन, चैन एवं खुशहाली की दुआ के साथ हो गया। अंतिम दिन समापन कार्यक्रम की दुआ में पहुंचने के लिए मुस्लिम समुदाय के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए। समापन से पहले तक हजारों मुस्लिम अकीदतमंद दुआ में शामिल हुए। इज्तिमा सम्पन्न होने से पहले मौलाना की तकरीर शुरू हुई। तकरीर में मौलाना ने दीन की बातों पर अमल करते हुए अल्लाह के बताए रास्ते पर चलने की हिदायत दी। जामताड़ा जिला सहित विभिन्न स्थानों से काफी संख्या में अकीदतमंद पहुंचे थे। अकीदतमंदों के बैठने के लिए काफी लंबा- चौड़ा पंडाल का इंतजाम किया गया था। पार्किग से लेकर पानी पिलाने, सफाई व्यवस्था, सामूहिक भोजन, नमाज पढ़ने के लिए वजू का इंतजाम आदि की व्यवस्था की गई थी। अहले सुबह नमाज अदा करने के बाद बाहर से आए मौलाना ने तकरीर करते हुए कहा कि इस्लाम के मुताबिक इंसान को इंसानियत के रास्ते बताएं। उन्होंने कहा कि इस्लाम को मानने वालों को उसके वसूलों को मानना चाहिए। उन्होंने बताया कि इंसान के जिस्म में मांस और हड्डियां है, लेकिन जो अच्छे व्यवहार करेगा उसको ही अल्लाह पसंद करेगा। मुसलमानों को चाहिए कि वह अपने व्यवहार से लोगों को इस्लाम का पैगाम दें, ताकि दुनिया व आखिरत दोनों जगह कामयाबी मिल सके। अकीदत मंदों को अल्लाह के रास्ते पर निकल कर दीन को सीखने की अपील की। उन्होंने भाईचारा व इंसानियत का भी पैगाम दिया। उन्होंने कहा कि कुरान पूरी दुनिया के इंसानों को अच्छी जिदगी जीने का तरीका बताता है। इसलिए कुरान की शिक्षा को सभी तक पहुंचाएं एवं कुरान को सीखें और उस पर अमल करें। कहा कि अल्लाह का हुक्म मानने के लिए जरूरी है कि पहले उसे समझा जाए और समझने के लिए राहे खुदा में निकलना जरूरी है। मौलाना ने कहा कि इज्तिमा का मकसद अच्छाई की दावत देना है और बुराई को खत्म करना है। बयान के बाद मौलाना के द्वारा दुआ कराई गई।और देश में अमन, चैन, शान्ति की दुआ मांगी गई। इस मौके पर मुफ्ती मोहम्मद सिद्दीक मजाहरी, मौलाना इरशाद आलम, मौलाना अब्दुल सत्तार मजाहरी, मौलाना रजाउद्दीन कासमी, मौलाना इमरान, मौलाना अब्बास कासमी, मौलाना अब्दुल जब्बार, मौलाना इमामुद्दीन, मौलाना कलीमउद्दीन, मौलाना जमील, मौलाना अनवर, मौलाना अजीमुद्दीन, कारी अब्दुल कुद्दूस ,हाफिज नाजिर हुसैन, हाफिज सादीर हुसैन, आदि हजारों की संख्या में उलेमा मौजूद थे !

