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    Home » भागवत कथा के छठे दिन सुनाया कृष्ण रासलीला का प्रसंग
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    भागवत कथा के छठे दिन सुनाया कृष्ण रासलीला का प्रसंग

    Nizam KhanBy Nizam KhanJanuary 9, 2025Updated:January 9, 2025No Comments2 Mins Read
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    भागवत कथा के छठे दिन सुनाया कृष्ण रासलीला का प्रसंग

    राष्ट्र संवाद संवाददाता

    भागवत कथा के छठे दिन सुनाया कृष्ण रासलीला का प्रसंग | विजया गार्डन में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के षष्ठम दिवस में क्लब ग्राउंड स्थित प्रांगण में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन की कथा प्रारंभ करते हुए कथावक्ता पंडित पवन कृष्ण महाराज जी ने भगवान की अनेक लीलाओं में श्रेष्ठतम लीला रास लीला का वर्णन करते हुए बताया कि रास तो जीव का शिव के मिलन की कथा है। यह काम को बढ़ाने की नहीं काम पर विजय प्राप्त करने की कथा है। इस कथा में कामदेव ने भगवान पर खुले मैदान में अपने पूर्व सामर्थ्य के साथ आक्रमण किया है लेकिन वह भगवान को पराजित नही कर पाया उसे ही परास्त होना पड़ा है रास लीला में जीव का शंका करना या काम को देखना ही पाप है गोपी गीत पर बोलते हुए व्यास जी ने कहा जब तब जीव में अभिमान आता है भगवान उनसे दूर हो जाता है लेकिन जब कोई भगवान को न पाकर विरह में होता है तो श्रीकृष्ण उस पर अनुग्रह करते है उसे दर्शन देते है। भगवान श्रीकृष्ण के विवाह प्रसंग को सुनाते हुए बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का प्रथम विवाह रुक्मणि माता के साथ संपन्न हुआ लेकिन रुक्मणि को श्रीकृष्ण द्वारा हरण कर विवाह किया गया। इस कथा में समझाया गया कि रुक्मणि स्वयं साक्षात लक्ष्मी है और वह नारायण से दूर रह ही नही सकती यदि जीव अपने धन अर्थात लक्ष्मी को भगवान के काम में लगाए तो ठीक नही तो फिर वह धन चोरी द्वारा, बीमारी द्वारा या अन्य मार्ग से हरण हो ही जाता है। धन को परमार्थ में लगाना चाहिए और जब कोई लक्ष्मी नारायण को पूजता है या उनकी सेवा करता है तो उन्हें भगवान की कृपा स्वत ही प्राप्त हो जाती है। श्रीकृष्ण भगवान व रुक्मणि जी के अतिरिक्त अन्य विवाहों का भी वर्णन किया गया। कथा के दौरान व्यास जी ने ने भजन प्रस्तुत किए।

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