देहरादून, 10 जुलाई (भाषा) कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने शुक्रवार को अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे और दान की कथित चोरी के मामले में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए प्रकरण की जांच उच्चतम न्यायालय की देखरेख में कराए जाने की मांग की। यह मुद्दा, जिसे उन्होंने ‘राम मंदिर चढ़ावा चोरी’ का नाम दिया है, देश भर में धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में गरमाहट पैदा कर रहा है। यह आरोप ऐसे समय में लगे हैं जब देश में धार्मिक आस्था और पारदर्शिता को लेकर जनमानस में गहरी भावनाएं जुड़ी हुई हैं।
अयोध्या में बन रहा राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और आस्था का प्रतीक है। इस मंदिर के निर्माण के लिए देश भर से करोड़ों लोगों ने श्रद्धापूर्वक दान दिया है। ऐसे में, किसी भी तरह की ‘चढ़ावा चोरी’ या अनियमितता की खबर जनता की भावनाओं को आहत कर सकती है और दानदाताओं के विश्वास को तोड़ सकती है। वेणुगोपाल के इस बयान ने इस संवेदनशील विषय को एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है।
उत्तराखंड के दो दिवसीय दौरे के अंतिम दिन यहां एक संवाददाता सम्मेलन में वेणुगोपाल ने कहा कि पिछले कई सालों से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) राम मंदिर के नाम पर चंदा इकट्ठा कर रहे हैं और उस सोने और पैसे को ट्रस्ट अथॉरिटी ने चोरी कर लिया। यह आरोप सीधे तौर पर मंदिर के प्रबंधन और दान की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है, जो लाखों भक्तों की आस्था से जुड़ा हुआ है।
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘मैं केवल एक सवाल पूछना चाहता हूं कि चंदा चोरी के लिए कौन जिम्मेदार है? राम मंदिर ट्रस्ट प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की देखरेख (सुपरविजन) में बनाया गया। प्रधानमंत्री इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं?’’ यह सीधा हमला प्रधानमंत्री की विश्वसनीयता और पारदर्शिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पर सवाल उठाता है। मंदिर ट्रस्ट का गठन और उसकी कार्यप्रणाली हमेशा से सार्वजनिक जांच के दायरे में रही है, और इस तरह के गंभीर आरोप उस जांच को और भी गहन बनाने की मांग करते हैं।
उन्होंने कहा कि वह मांग करते हैं कि पूरे प्रकरण की जांच उच्चतम न्यायालय की देखरेख में हो। उच्चतम न्यायालय की निगरानी में जांच की मांग इस बात का संकेत है कि कांग्रेस इस मुद्दे को अत्यंत गंभीरता से ले रही है और वह इसे राजनीतिक दायरे से ऊपर उठाकर एक निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना चाहती है। भारत के उच्चतम न्यायालय की भूमिका हमेशा से महत्वपूर्ण रही है, खासकर जब जनहित से जुड़े गंभीर मामले सामने आते हैं।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर गंभीर सवाल
वेणुगोपाल ने यह भी कहा कि पार्टी इस मामले को संसद में भी बड़े पैमाने पर उठाएगी। संसद में इस मुद्दे का उठना यह सुनिश्चित करेगा कि इस पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस हो और सरकार को जवाबदेह ठहराया जा सके। यह कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा है कि वह न केवल इस मुद्दे को उजागर करे, बल्कि सरकार पर दबाव बनाए ताकि कोई ठोस कार्रवाई हो।
संवाददाता सम्मेलन में कांग्रेस महासचिव और उत्तराखंड में पार्टी मामलों की प्रभारी कुमारी सैलजा एवं उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल भी मौजूद थे। यह दर्शाता है कि यह मुद्दा केवल राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि राज्य स्तर पर भी कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण है, खासकर आगामी चुनावों को देखते हुए।
अगले साल की शुरूआत में उत्तराखंड में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए वेणुगोपाल ने कहा कि दो दिनों में उन्होंने पार्टी की चुनावी तैयारियों की समीक्षा की तथा इस दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से लेकर प्रदेश की राजनीतिक मामलों की समिति, जिला कांग्रेस कमेटियों के अध्यक्षों, फ्रंटल संगठनों, विभागों एवं विधायकों एवं पूर्व विधायकों के साथ बैठकें कीं। यह यात्रा कांग्रेस की उत्तराखंड में अपनी पकड़ मजबूत करने की कवायद का हिस्सा थी, जहां वह मौजूदा भाजपा सरकार को चुनौती देना चाहती है।
उन्होंने कहा, ‘‘बहुत खुशी से मैं कहना चाहता हूं कि प्रदेश में पार्टी संगठन और नेतागण पूरी ताकत से चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं। प्रदेश में सब नेता एक साथ लड़ेंगे और जीतेंगे।’’ यह आत्मविश्वास ऐसे समय में दिखाया जा रहा है जब कांग्रेस पूरे देश में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए संघर्ष कर रही है, और उत्तराखंड एक महत्वपूर्ण राज्य हो सकता है।
वेणुगोपाल ने कहा कि विभिन्न बैठकों में नेताओं से बातचीत करने के बाद उनकी यह धारणा बनी है कि प्रदेश के लोग वर्तमान सरकार के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 10 सालों में भाजपा सरकार से लोगों के मन में बहुत निराशा हुई है और प्रदेश में सरकार के खिलाफ बने इस वातावरण को कांग्रेस अपने पक्ष में करने के लिए पूरा जोर लगाएगी। यह दर्शाता है कि कांग्रेस राज्य में सत्ता विरोधी लहर का फायदा उठाने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में सबसे बड़ा मुद्दा बेरोजगारी और उसके कारण हो रहा पलायन है लेकिन पिछले 10 सालों में भाजपा की सरकार ने उसके लिए ‘कुछ नहीं’ किया। उन्होंने कहा, ‘‘हम उत्तराखंड के युवाओं के लिए लड़ाई लड़ेंगे।’’ बेरोजगारी और पलायन उत्तराखंड के लिए गंभीर सामाजिक और आर्थिक मुद्दे हैं, जिन पर कांग्रेस अपनी चुनावी रणनीति केंद्रित कर रही है।
वेणुगोपाल ने कहा कि उत्तराखंड में चुनाव घोषणापत्र तैयार करने के लिए एक ‘‘मैनीफेस्टो कमेटी’’ बनायी जाएगी जो युवा, छात्र, किसान, महिला सहित सभी वर्गों के लोगों के बीच जाकर मुद्दे टटोलेगी और उसके आधार पर एक अच्छा घोषणापत्र बनाया जाएगा। यह समावेशी दृष्टिकोण कांग्रेस को विभिन्न वर्गों के मतदाताओं तक पहुंचने में मदद कर सकता है। राम मंदिर चढ़ावा चोरी जैसे राष्ट्रीय मुद्दों को राज्य के स्थानीय मुद्दों के साथ जोड़कर कांग्रेस भाजपा पर दोहरा दबाव बनाने की कोशिश कर रही है।

