ईएल भुगतान में लापरवाही से यूसील को भारी नुकसान, ठेका मजदूरों की हड़ताल के बाद टूटी प्रबंधन की नींद
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जादूगोड़ा। यूसील (यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड) प्रबंधन की शिथिलता और वादा-खिलाफी के कारण ठेका मजदूरों को बार-बार हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ रहा है, जिससे कंपनी को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। लगभग एक वर्ष से लंबित ईएल (अर्न्ड लीव) की राशि को लेकर कई दौर की बैठकें हुईं, लेकिन भुगतान नहीं होने से मजदूरों में आक्रोश बढ़ता गया।
आखिरकार 13 और 14 जनवरी को ठेका मजदूरों ने हड़ताल कर दी। हड़ताल शुरू होते ही यूसील प्रबंधन सक्रिय हुआ और महज दो दिनों के भीतर लेखा विभाग ने दो वर्षों की बकाया ईएल राशि मजदूरों के खातों में भेज दी। इससे मजदूरों में संतोष है, लेकिन प्रबंधन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
मजदूर नेताओं का कहना है कि यदि समय पर भुगतान किया जाता तो हड़ताल की नौबत नहीं आती और यूसील को करोड़ों के नुकसान से बचाया जा सकता था। बार-बार हड़ताल से यूसील की छवि धूमिल हो रही है और प्रबंधन की कार्यक्षमता पर भी प्रश्नचिह्न लग रहा है।
मामला यहीं तक सीमित नहीं है। यूसील अस्पताल में दवाइयों की आपूर्ति करने वाली आउटसोर्सिंग कंपनी के फार्मा को पांच महीने से भुगतान नहीं होने के कारण दवा काउंटर कई बार बंद करना पड़ा। काफी प्रयास के बाद सिर्फ 88 लाख रुपये का भुगतान हुआ है, जबकि तीन करोड़ रुपये से अधिक अब भी बकाया है, जिसका सीधा असर मजदूरों और कर्मचारियों पर पड़ रहा है।
मजदूरों का आरोप है कि यूसील में भ्रष्टाचार बढ़ता जा रहा है और कई अधिकारी जांच के दायरे में आकर कार्रवाई भी झेल चुके हैं। बावजूद इसके हालात में सुधार नहीं हो रहा। मजदूरों ने मांग की है कि प्रबंधन अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करे, अन्यथा आंदोलन और तेज किया जाएगा।


