पिक्टोरियल फोटोग्राफी में नरेश अग्रवाल को पुरस्कार
राष्ट्र संवाद संवाददाता
नरेश अग्रवाल उभरते हुए छायाकर हैं जो ग्रामीण क्षेत्र के जनजीवन एवं वहां की खूबसूरती को कैमरे से कैद कर दुनिया के सामने लाते हैं। उनकी तस्वीरें भारत ही नहीं विदेशों में भी पसंद की जाती हैं ।

हाल ही में इंदौर के मालवा इंटरनेशनल सेलून में जिसमें कि 35 देश के प्रतिभागियों ने भाग लिया था, उनकी दो तस्वीरें प्रदर्शनी के लिए स्वीकृत की गई हैं । एक दूसरे भारतीय स्तर के सेलून आर्टिस्टिक नेशनल सेलून 2025 में रंगीन तस्वीरों के ग्रुप में पहला स्थान प्राप्त हुआ तथा अन्य दो तस्वीरें प्रदर्शनी के लिए भी स्वीकृत की गईं।
विख्यात फेसबुक ग्रुप विजुअल स्ट्रीट फोटोग्राफी की एडमिन वेलेंटाइन डीमातो ने इन्हें “फोटोग्राफर ऑफ दी मंथ” घोषित किया है। ये ग्रामीण जीवन की दिनचर्या, उनके रहन-सहन, काम करने के तरीके, खेती-बाड़ी आदि के सौंदर्य को जीते जागते स्वरूप में दुनिया के सामने प्रस्तुत करते हैं।
इन्होंने सबर जाति जो कि बेहद पुरानी आदिम जनजाति कही जाती हैं पर विशेष काम किया है। उनकी तस्वीरों के, लुभाने वाले स्वरूप को दुनिया के सामने प्रस्तुत किया है ।

इनके पास ग्रामीण जीवन की असंख्य तस्वीरें संग्रहित हैं जिन्हें पुस्तक का आकार देने के इच्छुक हैं ।इनका कार्य क्षेत्र झारखंड के अलावा बंगाल और उड़ीसा की पृष्ठभूमि से है। स्ट्रीट फोटोग्राफी में भी इनको महारत हासिल है। उनके काम को देखते हुए आगे भी ऐसे ही अनेकों पुरस्कार मिलने की संभावना बनी हुई है।


