जेल से रची गई हत्या की साजिश का खुलासा, जमीन विवाद में प्रज्ञा केंद्र संचालक की गोली मारकर हत्या
राष्ट्र संवाद संवाददाता
पूर्वी सिंहभूम जिले के गालूडीह थाना क्षेत्र अंतर्गत खड़िया कॉलोनी में प्रज्ञा केंद्र संचालक सह उपमुखिया पति तारापदो महतो उर्फ उमाकांत महतो की सनसनीखेज हत्या की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। बुधवार को ग्रामीण एसपी ऋषभ गर्ग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस हत्याकांड का खुलासा करते हुए बताया कि यह वारदात जमीन विवाद के चलते पूरी साजिश के तहत अंजाम दी गई थी। पुलिस जांच में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि हत्या की पूरी प्लानिंग घाटशिला जेल के भीतर की गई थी। आर्म्स एक्ट के मामले में जेल में बंद जितेन्द्र दुबे ने जेल से ही हत्या की साजिश रची, जबकि उसके भाई छोटू गोराई ने बाहर रहकर शूटरों का इंतजाम किया। पुलिस के अनुसार छोटू गोराई ने जगरनाथ गोराई को हत्या के लिए 1.5 लाख रुपये की सुपारी दी थी। इसके बाद जगरनाथ गोराई ने इस वारदात को अंजाम देने के लिए बिरसानगर निवासी विकास दुबे और अभिषेक कुमार उर्फ गोलू को महज 10-10 हजार रुपये का लालच देकर अपने साथ शामिल कर लिया। घटना के दिन जगरनाथ गोराई अपनी बाइक पर विकास और अभिषेक को लेकर गालूडीह पहुंचा। जैसे ही तारापदो महतो अपनी दुकान बंद कर रहे थे, उसी दौरान अभिषेक और जगरनाथ दुकान के भीतर घुसे। अभिषेक ने पहले चाकू से ताबड़तोड़ वार कर तारापदो महतो को गंभीर रूप से घायल किया, इसके बाद जगरनाथ ने बेहद नजदीक से गोली मारकर उनकी हत्या कर दी, और तीनों मौके से फरार हो गए। ग्रामीण एसपी ऋषभ गर्ग ने बताया कि पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए विकास दुबे और अभिषेक कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। उनकी निशानदेही पर पुलिस ने एक देसी कट्टा (हत्या में प्रयुक्त), खून लगा चाकू और वारदात में इस्तेमाल की गई बाइक बरामद की है। वहीं इस कांड के मुख्य आरोपी जगरनाथ गोराई और छोटू गोराई फिलहाल फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की विशेष टीमें लगातार संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं। साथ ही जेल में बंद जितेन्द्र दुबे को रिमांड पर लेकर पूछताछ किए जाने की तैयारी की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही इस हत्याकांड से जुड़े सभी आरोपियों को कानून के शिकंजे में लिया जाएगा।

