राष्ट्र संवाद संवाददाता
चांडिल अनुमंडल क्षेत्र में अवैध बालू खनन और परिवहन का मामला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। जिला उपायुक्त के निर्देश पर खनन विभाग अवैध खनन और परिवहन के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रहा है, लेकिन पुलिस प्रशासन के सहयोग को लेकर आम लोगों के बीच सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के नियम लागू होने के बावजूद सुवर्णरेखा नदी से बड़े पैमाने पर अवैध बालू खनन और परिवहन जारी है। रात के समय भारी वाहनों, ट्रैक्टरों तथा टिप ट्रेलरों के माध्यम से बालू की ढुलाई खुलेआम की जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर यह कारोबार थाना क्षेत्र ही नहीं, बल्कि थाने के सामने से भी बेखौफ संचालित हो रहा है।
इसी क्रम में 10 जून की देर रात कपाली ओपी क्षेत्र में जिला खनन विभाग ने अवैध बालू लदे एक टिप ट्रेलर को जब्त किया। विभाग की इस कार्रवाई को सराहनीय माना जा रहा है, क्योंकि इससे सरकार को हो रही राजस्व क्षति का मामला उजागर हुआ है।
विगत दिनों में खनन विभाग द्वारा की गई औचक छापेमारियों में कई अवैध खनन और परिवहन में लगे वाहन पकड़े गए हैं। दूसरी ओर, पुलिस प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अपराध नियंत्रण में सक्रिय दिखाई देता है, लेकिन अवैध बालू कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाने में उसकी भूमिका सवालों के घेरे में है।
गुरुवार को समाचार संकलन के दौरान चौका-पातकुम मार्ग सहित विभिन्न क्षेत्रों में दर्जनों ट्रैक्टर और भारी वाहन बालू परिवहन करते देखे गए। इससे यह सवाल उठ रहा है कि जब अवैध परिवहन खुलेआम हो रहा है, तो संबंधित एजेंसियों की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
राज्य के मुख्यमंत्री Hemant Soren ने अवैध खनन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की घोषणा की है। इसके बावजूद क्षेत्र में अवैध खनन और परिवहन का जारी रहना कई सवाल खड़े कर रहा है। आखिर किसके संरक्षण में यह कारोबार फल-फूल रहा है और सरकार की मंशा के विपरीत हालात क्यों बने हुए हैं, यह जांच का विषय बनता जा रहा है। आमजन भी इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

