मणिपाल टाटा मेडिकल कॉलेज छात्र की आत्महत्या, एंबुलेंस में विलंब और प्रबंधन की लापरवाही पर उठे सवाल
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर :मणिपाल टाटा मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस तृतीय वर्ष के छात्र दिव्यांशु पांडे (निवासी समस्तीपुर, बिहार) ने गुरुवार शाम हॉस्टल के कमरे में सल्फास की गोली खाकर आत्महत्या कर ली। सहपाठियों ने उसे बचाने की कोशिश की लेकिन कॉलेज प्रबंधन की ओर से तत्काल एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण इलाज में देरी हुई और उसकी मौत हो गई।

छात्रों का आरोप है कि हालत बिगड़ने पर जब एंबुलेंस की मांग की गई तो प्रबंधन की ओर से उदासीनता बरती गई। मजबूरी में दिव्यांशु को निजी वाहन से पहले मर्सी अस्पताल और बाद में टीएमएच ले जाया गया, जहां शाम 7 बजे डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

घटना के बाद कॉलेज प्रबंधन पर सवाल खड़े हो गए हैं। छात्र गुस्से में हैं और मानते हैं कि यदि समय पर एंबुलेंस उपलब्ध हो जाती तो दिव्यांशु की जान बच सकती थी।

हालांकि कॉलेज प्रबंधन की ओर से प्रो. प्रियंका सिंगल ने घटना को अफसोसजनक बताते हुए कहा कि दिव्यांशु का शव उसके भाई सुधांशु पांडे को सौंप दिया गया है। उधर पुलिस मामले की जांच कर रही है और कॉलेज हॉस्टल में रहने वाले छात्रों से पूछताछ भी की गई है।

दिव्यांशु की मौत के बाद हॉस्टल में शोक और आक्रोश का माहौल है। छात्र प्रबंधन की लापरवाही को मौत का बड़ा कारण मान रहे हैं और जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहे हैं।


