लेखक: राष्ट्र संवाद जादूगोड़ा
जादूगोड़ा में धूमकुड़िया भवन को लेकर विवाद गहरा गया है। पूर्वी सिंहभूम जिले के आस्था केंद्र रंकीनी मंदिर परिसर में बने इस भवन पर पांच गांवों के ग्रामीणों ने तालाबंदी का नोटिस चस्पा कर प्रशासन को खुली चुनौती दे दी है।
आरोप: बिना ग्रामसभा के दी गई चाबी, बिल्डिंग में दरारें, छत से टपक रहा पानी, ठेकेदार पर कार्रवाई की मांग
जादूगोड़ा. पूर्वी सिंहभूम जिले के आस्था केंद्र रंकीनी मंदिर का विवाद एक बार फिर तूल पकड़ रहा है। करीब 3 करोड़ की लागत से बने धूमकुड़िया भवन में कार्यक्रम और बुकिंग को लेकर 5 गांवों के ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है।
ग्रामसभा के बैनर तले ग्रामीणों ने गुरुवार को भवन पर नोटिस चिपकाकर साफ चेतावनी दे दी कि जांच रिपोर्ट आने और प्रशासनिक फैसला होने तक यहां किसी भी तरह के आयोजन पर रोक लगाई जाए।
क्या है पूरा मामला
ग्रामसभा की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि धूमकुड़िया भवन को लेकर पहले से जांच चल रही है। रोहिणी बेड़ा समेत 5 गांवों के लोगों का तर्क है कि जांच पूरी होने से पहले बुकिंग और कार्यक्रमों की इजाजत देना गलत होगा।
ग्रामीणों का कहना है, “रंकीनी मंदिर सिर्फ पूजा स्थल नहीं है। यह हमारे 5 गांवों की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान है। ऐसे में भवन के इस्तेमाल में ग्रामसभा की सहमति जरूरी है।”
सबसे बड़ा सवाल: बिना पूछे चाबी किसने दी?
ग्रामसभा ने प्रशासन से सवाल किया है कि बिना ग्रामसभा की जानकारी के कमिटी बनाकर सरकारी भवन की चाबी किस आधार पर सौंपी गई। ग्रामीणों ने इसकी भी जांच कराने की मांग की है।
धूमकुड़िया भवन की हालत भी खराब, ठेकेदार पर उठे सवाल
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि धूमकुड़िया भवन अभी से जर्जर होने लगा है।
- बिल्डिंग में कई जगह दरारें पड़ गई हैं
- छत के ऊपर पाइपलाइन नहीं लगने से पूरी बिल्डिंग में पानी रिस रहा है
- ठेकेदार ने काम अधूरा छोड़ दिया है
ग्रामीणों ने मांग की है कि भवन की गुणवत्ता की भी जांच हो और दोषी ठेकेदार पर कार्रवाई की जाए। इस संबंध में ग्रामीण पहले भी उपायुक्त को कई बार पत्र दे चुके हैं।
आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने साफ कहा है कि अगर उनकी मांग नहीं मानी गई तो वे फिर सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे।
एक ग्रामीण ने कहा, “हम शांति चाहते हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कोई फैसला हो। तब तक धूमकुड़िया भवन की बुकिंग बंद रखी जाए। हम किसी का विरोध नहीं कर रहे।”
नोटिस चिपकते ही मंदिर समिति और प्रशासन के बीच हलचल तेज हो गई है। फिलहाल ग्रामसभा के इस कदम के बाद 3 करोड़ का धूमकुड़िया भवन एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है।
अब प्रशासन इस पर क्या रुख अपनाता है, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं। इस मामले ने एक बार फिर सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और ग्रामसभा के अधिकारों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। झारखंड सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर भी इस तरह की शिकायतों के निवारण की व्यवस्था है।

