लिव-इन रिलेशन भारतीय प्राण धर्म के लिए चुनौती : आनंद मार्ग सेमिनार
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर। आनंद मार्ग प्रचारक संघ के तीन दिवसीय ब्लॉक स्तरीय सेमिनार में “प्राण धर्म” विषय पर विचार व्यक्त करते हुए ट्रेनर सुनील आनंद ने कहा कि लिव-इन रिलेशन भारतीय प्राण धर्म को झकझोर रहा है। यह संस्कृति भगवान शिव द्वारा स्थापित विवाह प्रथा का अपमान है।

उन्होंने कहा कि शिव ने विवाह की परंपरा को जन्म देकर महिलाओं को सम्मान दिया और एक संगठित सभ्यता की नींव रखी। लिव-इन संस्कृति उस सभ्यता और भारत के प्राण धर्म का विरोध करती है।

वक्तव्य में कहा गया कि किसी भी समाज या राष्ट्र की आत्मा उसके “प्राण धर्म” में निहित होती है, जो मानव को पशुत्व से उठाकर दिव्यता की ओर ले जाती है। भारत की सभ्यता सदियों से इसी आध्यात्मिक दृष्टिकोण पर आधारित रही है।

आनंद मार्ग ने विदेशी शासन और भौतिकवादी विचारधारा द्वारा भारतीय प्राण धर्म को कमजोर करने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज भौतिकता और तनाव से ग्रसित दुनिया में आनंद मार्ग का संदेश और भी प्रासंगिक हो गया है।


