तेरे हिस्से कृष्ण न आएंगे !
हर मोड़ पे युद्ध सजा होगा,
शतरंज का मंच रचा होगा,
लाख जतन कर लो फिर भी
अंतर घमासान मचा होगा,
छाले स्वर में पड़ जाएंगे
कोई साथ न देने आयेंगे
तुम इस कलयुग के अर्जुन हो
तेरे हिस्से कृष्ण न आएंगे।
संबंधों के तुम हो गणितज्ञ
अपनत्व के पर मर्मज्ञ नहीं ,
हैं स्वार्थ साधना तेरा लक्ष्य
मानव हित कोई यज्ञ नहीं ,
तलवे चोटिल हो जायेंगे
सन्नाटे शोर मचायेंगे,
तुम इस कलयुग के अर्जुन हो
तेरे हिस्से कृष्ण न आएंगे।
:– डॉ कल्याणी कबीर

